जरूरते पूरी करना हो रहा है मुश्किल,स्कूल फीस कैसे जमा करें

आगरा। अनलॉक डाउन जारी है । शर्तो के साथ बाजार भी खोले जा रहे है लेकिन लॉकडाउन की वजह से जो काम – धंधे बंद पड़े हुए थे। इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ा है। लोगों के हाथों से काम छिन गया है। इन परिस्थितियों में तमाम लोगों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो रहा है। उस पर लॉक डाउन के दौरान की तीन माह की बच्चों की स्कूल फीस जमा करना लोगों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। खासतौर पर महिलाएं इसे लेकर ज्यादा चिंतित हैं। उनकी ओर से स्कूल प्रबंधनों से अपील की जा रही है कि वे तीन माह की फीस माफ कर अभिभावकों को राहत देने का काम करें। उनका कहना है कि जब कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में हर कोई एकदूसरे की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ा रहा है, तो ऐसे में स्कूल प्रबंधनों को आगे आना चाहिए। उन्हेें फीस माफ कर अभिभावकों को बड़ी राहत देने का काम करना चाहिए।

क्या कहना है अभिभावकों का

प्रिया अग्रवाल

स्कूल और बच्चों का गहरा नाता होता है। आपदा के इस दौर में इस रिश्ते को निभाने की बड़ी जिम्मेदारी अब स्कूलों की है। उन्हें फीस माफ कर अभिभावकों को राहत देने का काम करना चाहिए।

 

पूनम जेटली

स्कूलों द्वारा हर साल गर्मी की छुट्टियों की भी फीस वसूल की जाती है। आपदा के इस दौर में पहली बार रियायत देने का मौका आया है। स्कूलों को आगे बढ़कर अभिभावकों की मदद करनी चाहिए।

 

लॉकडाउन की वजह से तमाम लोगों के समक्ष रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट मंडरा रहा है। ऐसे में स्कूल फीस जमा करने में बहुत मुश्किल होगी। स्कूल प्रबंधन को आगे आकर रियायत देनी चाहिए।

 

अनुपमा चतुर्वेदी

लॉकडाउन की वजह से काम – धंधे बंद पड़े हुए हैं। रोजगार ठप पड़े हुए हैं। आपदा के इस दौर में स्कूल प्रबंधनों को बच्चों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। फीस माफी का निर्णय लेना चाहिए।

पारुल मंगल

आपदा के इस दौर में हर कोई एकदूसरे की मदद के लिए खड़ा हुआ है। स्कूल प्रबंधनों को भी हाथ आगे बढ़ाना चाहिए। उन्हें फीस माफ कर कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई में सहयोग देना चाहिए।

ममता सक्सेना

गर्मी की छुट्टियों की भी पूरी फीस ली जाती है। अभिभावक बेझिझक अदा भी करते हैं। पहली बार स्कूलों को मौका मिला है मदद करने का। उन्हें खुद आगे आकर फीस माफ करनी चाहिए।
– अभिभावक

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