आइए, जानते हैं कि छठ पूजा में क्या करें और क्या न करें….

छठ पूजा का त्योहार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से 3 दिन तक मनाएं जाने वाला त्योहार है। छठ पूजा पूर्वांचल व बिहार, झारखंड में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। यह पूजा नहाए खाए के साथ शुरू होती है और 3 दिनों तक चलती है। इस त्योहार में सूर्य भगवान की छोटी बहन छठी मैय्या की पूजा की जाती है। मान्यता है कि छठी मैय्या बहुत जल्द ही क्रोधित हो जाती हैं। इसीलिए छठ पूजा में कुछ विशेष बातें ध्यान रखना आवश्यक हैं। आइए, जानते हैं कि छठ पूजा में क्या करें और क्या न करें….

  • छठ मैय्या का प्रसाद बनाते समय सफाई का ध्यान अवश्य रखें और नहाकर ही प्रसाद बनाएं। गुड़ और आंटे की विशेष मिठाई ठेकुआ अवश्य बनाएं।
  • छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य अवश्य दें। बिना सूर्य को अर्घ्य दिए छठ पूजा का व्रत पूरा नहीं होता है।
  • छठ पूजा का प्रसाद बनाते समय मौन व्रत अवश्य रखें। प्रसाद बनाते समय तक जल नहीं ग्रहण करना चाहिए।
  • छठ पूजा के समय नए वस्त्रों का ही प्रयोग करें। अगर नए वस्त्र नहीं हैं तो उस वस्त्र का प्रयोग करें जो अच्छी तरह से साफ हो।
  • छठ पूजा के प्रसाद में केला अवश्य चढ़ाएं बिना केले के प्रसाद के पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • छठी मैय्या के प्रसाद पर भूलकर भी पैर नहीं लगना चाहिए। ऐसा होने पर आपको छठी मैय्या का प्रकोप झेलना पड़ सकता है।
  • छठी मैय्या को यादकर जो भी मनौती मानी हो उसे भूलना नहीं चाहिए, उसे समय पर पूरा कर लें।
  • सूर्य भगवान को अर्घ्य देते समय चांदी, स्टील, प्लास्टिक व शीशे के बर्तन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • छठ पूजा में प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए और न ही मांस मदिरा का सेवन करना चाहिए।
  • छठ पूजा में बह्मचर्य का पालन करना चाहिए। जहां पर भोग का प्रसाद बन रहा हो वहां पर किसी को भोजन नहीं करना चाहिए।

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