रोशनी की चकाचौंध में फिर से एय्याशी कर रहे शहर के युवा और अधेड़

आगरा। रोशनी एक ऐसा नाम जिसने लगभग चार साल पहले पुलिस महकमे में हडकंप मचा दिया था। कई पुलिस अधिकारियों पर गाज गिरी थी। जिस्म फरोशी के सौदागरों में बड़ा नाम रोशनी एक बार फिर से पूरी तरह से सक्रीय है।अब रोशनी का नेटवर्क आगरा ही नहीं बल्कि पूरे देश में चल रहा है। सूत्रों के अनुसार रोशनी अब होटल एरिया में एक होटल लेकर जिस्म फरोशी का धंधा संचालित कर रही है। हालंकि रोशनी अब सिर्फ फ़ोन के माध्यम से ही अपने क्लाइंट्स के संपर्क में रहती है।जिस्म फरोशी के धंधे में सरताज रह चुकी रोशनी फिर से युवायो और अधेड़ो कि ऐयाशी के लिए मुफीद नाम बनती जा रही है।

आगरा में रौशनी एक ऐसा नाम है, जिसे जिस्म फरोशी का धंदा करने बाले लोग बड़ी इज्जत से लेना पसंद करते हैं। दरअसल, रौशनी ने अपने हुस्न और तेज दिमाग से आगरा शहर में अपना बहुत बड़ा नेटवर्क बना लिया है। लेकिन
2015 में जिस्म फरोशी के धंधे की सरताज रौशनी का नाम जब अखबारों की सुर्खियों में आया तो पुलिस महकमे के कुछ अधिकारियों का भविष्य अंधकार में चला गया। रोशनी प्रकरण में पांच पुलिस अधिकारियों पर गाज गिरी थी।

रोशनी के नेटवर्क में शहर के बड़े अधिकरियों नेताओ के साथ-साथ कलम के सिपाही भी इसके संपर्क में थे यही वजह रही है की एक लम्बे समय से जिस्मफरोशी का धंधा संचालित कर रही रौशनी पुलिस की पकड़ से दूर रही. लेकिन, रौशनी के पार्टनर रहे युवक आशीष अग्रवाल उर्फ आशू के रहस्यमय तरीके से गायब हो जाने के बाद मीडिया की नजर रौशनी और उसके गंदे धंधे पर पढ़ गयी।
मामला सुर्खियो में आने के बाद कई अधिकारियों ने रौशनी और उसके साथियों को राहत देने के लिए मोटी रकम भी वसूली। लेकिन, पूरा मामला शासन तक पहुंच जाने के बाद पैसे वसूलने बाले अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही हो चुकी थी। उन्हें अपने पद से मुक्त करके दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया था।
गौरतलब है कि चार मई 2015 को अशोक कुमार ने सिकंदरा थाने में अपने भांजे आशीष अग्रवाल उर्फ आशू के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि आशू आठ जनवरी, 2015 से लापता है। उसकी गाड़ी, मोबाइल और अन्य सामान उसके दोस्तों के पास है। उन्हें आशू के साथ अप्रिय घटना की आशंका है। मामले में पुलिस ने महर्षिपुरम निवासी रोशनी प्रिया को जेल भेजा था। रोशनी की आशू से नजदीकियां थीं। पुलिस ने तीन दिन की रिमांड पर उससे पूछताछ की थी। जिला जज ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद आदेश में लिखा कि आरोपी रोशनी ने धारा 161 सीआरपीसी के बयान में कहा है कि उसकी आशू से दोस्ती थी। इसके बाद लवकुश से नजदीकियां हो गईं। उसे नहीं मालूम कि आशू कहां है। विवेचक ने अभी तक किसी स्वतंत्र साक्षी का साक्ष्य अंकित नहीं किया है तथा आशू के जीवित अथवा मृत होने का भी कोई साक्ष्य संकलित नहीं किया गया। घटना की रिपोर्ट तकरीबन चार माह बाद देरी से कराई गई। इसका कारण नहीं बताया गया। कोर्ट ने रोशनी को 50 हजार रुपये के जमानती व इतनी ही राशि के निजी मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए थे । इसके बाद पुलिस ने भी आशु अपहरण काण्ड कि फ़ाइल को ठन्डे बसते में डाल दिया।

वही जेल से बाहर आने के बाद रोशनी कुछ समय के लिए आगरा छोड़कर मथुरा ,नॉएडा और दिल्ली रहने लगी। और पिछले चार सालो में अपने नेटवर्क को मजबूत कर फिर से आगरा में सक्रीय हो गयी। पूरे देश के जिस्म के सौदागरों के कई व्हात्स एप ग्रुप्स में रोशनी सक्रीय सदस्य है। अब उसका नेटवर्क शहर के साथ साथ पूरे देश में संचालित है।

 

आगे के अंक में -व्हाट्सप्प ग्रुप संचालित होता दिल्ली से नाम मुंबई का , स्टाफ और गुडविल का मामला रहता है चर्चा में , रोशनी के अलावा आगरा के कई छोटे प्यादे भी है इन ग्रुप्स में

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