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आगरा कॉलेज में बिना अनुमति पेड़ कटाई का मामला सीईसी तक पहुंचा, आज होगी सुनवाई :

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 आगरा। आगरा कॉलेज परिसर और उसके आसपास बिना अनुमति काटे गए हरे-भरे पेड़ों का मामला अब और गंभीर हो गया है। शिकायतकर्ता अपूर्व शर्मा द्वारा की गई शिकायत पर सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने संज्ञान लेते हुए गुरुवार को इस मामले की सुनवाई तय की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आगरा कॉलेज के प्राचार्य परिसर और आसपास के क्षेत्र में कई प्रतिबंधित प्रजातियों के पूर्ण विकसित पेड़ और सघन हरित क्षेत्र को बिना किसी अनुमति, स्वीकृति या पर्यावरणीय मूल्यांकन के काट दिया गया। यह कार्रवाई न केवल नियमों का उल्लंघन मानी जा रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों की सीधी अवहेलना भी बताई जा रही है।

पेड़ कटाई पर गंभीर सवाल, CEC की आज सुनवाई

अपूर्व शर्मा द्वारा दर्ज की गई शिकायत में कहा गया कि पेड़ काटने की कार्रवाई न तो किसी विभागीय अनुमति से की गई और न ही इसकी कोई सार्वजनिक जानकारी जारी की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए CEC ने तुरंत नोटिस लेते हुए गुरुवार को सुनवाई निर्धारित की है। बताया जा रहा है कि इस सुनवाई में कॉलेज प्रशासन और संबंधित विभाग को जवाब देना होगा कि पेड़ काटने की अनुमति किस आधार पर दी गई या बिना अनुमति यह कार्रवाई क्यों की गई।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

  • आगरा कॉलेज शहर का पुराना और महत्वपूर्ण शैक्षिक संस्थान है, जिसके परिसर में कई दशकों पुराने, पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पेड़ मौजूद हैं।
  • प्रतिबंधित श्रेणी के पेड़ों को काटने को लेकर सरकारी नियम बेहद सख्त हैं।
  • बिना अनुमति पेड़ कटाई को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन की श्रेणी में रखा जाता है।
  • CEC में मामला पहुंचना बताता है कि शिकायत गंभीर और उच्च स्तर की है।

शिकायतकर्ता ने क्या कहा?

शिकायतकर्ता अपूर्व शर्मा का कहना है कि“कॉलेज प्रशासन द्वारा पेड़ों की कटाई पूरी तरह मनमाने तरीके से की गई है। कई वर्षों पुराने बड़े पेड़ों को हटाया गया है, जिससे हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। यह पर्यावरण को सीधे नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई है, इसलिए इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।”

CEC क्या कर सकता है?

CEC (Central Empowered Committee) सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक महत्वपूर्ण समिति है जो पर्यावरण से जुड़े मामलों पर फैसला लेती है।आज की सुनवाई में यह तय हो सकता है कि:

  • पेड़ काटने की अनुमति किसने दी
  • क्या पर्यावरणीय नियमों का पालन हुआ था
  • दोषियों पर क्या कार्रवाई हो
  • और क्या हरित क्षेत्र की भरपाई के लिए पुनर्वनीकरण का आदेश दिया जाए

आज की सुनवाई पर शहर की निगाहें

चूंकि यह मामला आगरा के सबसे पुराने शिक्षण संस्थान और हरित क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों, छात्रों और समाजसेवी संगठनों की निगाहें आज होने वाली CEC की सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

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