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  • आगरा में 3.32 करोड़ की नकली दवाइयां जब्त — सहायक औषधि आयुक्त को अचानक रिलीव किए जाने की चर्चा से बाजार में खलबली
  • बाजार में ‘फेक मेडिसिन का बादशाह’ बचाने की चर्चाएँ तेज…

आगरा। ताजनगरी में नकली दवाओं के खिलाफ चल रही ऐतिहासिक छापेमारी अचानक सवालों के घेरे में आ गई है। मंगलवार को जब एसटीएफ और औषधि विभाग की संयुक्त टीम छापेमारी कर रही थी, तभी बस्ती के सहायक औषधि आयुक्त नरेश मोहन दीपक को कार्रवाई के बीच हटाया गया — एक ऐसा कदम जिसने दवा मंडी में भूचाल ला दिया।

कितनी जब्त हुई — 3.32 करोड़ की मुफ्ता दवाइयां

22 अगस्त से जारी छापेमारी में अब तक करीब ₹3.32 करोड़ की नकली दवाएं बरामद की जा चुकी हैं। इस मामले में हे मां मेडिको के मालिक हिमांशु अग्रवाल को जेल भेजा गया है।

बादशाह के गोदाम में मिलने की उम्मीद थी — हिमांशु से कहीं ज़्यादा माल

सूत्रों का दावा है कि हिमांशु केवल एक मोहरा है। असली जखीरा जिसे बाजार में “फेक मेडिसिन का बादशाह” कहा जा रहा है उसके गोदामों में होने की उम्मीद जताई जा रही थी। कहा जा रहा है कि बादशाह के पास हिमांशु से कई गुणा ज्यादा स्टॉक है और उसे पकड़ने के लिए बड़ी धाराओं में नया मुक़दमा दर्ज किए जाने की तैयारी चल रही थी।

कार्रवाई के बीच अचानक अधिकारी हटने से उठे सवाल

मंगलवार दोपहर जब हिमांशु पर सख्त धाराएं जोड़ने का निर्णय बन रहा था, तभी अचानक जांच की अगुवाई कर रहे नरेश मोहन दीपक को रिलीव कर देने की चर्चाएं शुरू हो गई । उनके स्थान पर आगरा के सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय को चार्ज सौंपा गया। नरेश मोहन का फोन मंगलवार शाम से बंद बताया गया। इस तरह के अचानक बदलाव ने ‘सेटिंग’ और ‘ऊपर तक साज़िश’ जैसी चर्चाओं को हवा दे दी है।

कारोबारियों की प्रतिक्रिया:

दवा मंडी के कई ईमानदार कारोबारियों ने निराशा जताई — उनका कहना है, “अब फेक मेडिसिन का बादशाह बच जाएगा।” बाजार में डर है कि सत्ता के ऊपरी संपर्कों के कारण बड़ी सफाई संभव न हो पाए।

कौन है यह ‘बादशाह’?

सूत्रों के मुताबिक यह व्यक्ति पिछले 35 साल से इस अवैध धंधे में सक्रिय है और उसका टर्नओवर हिमांशु से लगभग 8 गुना ज्यादा बताया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में नकली दवाओं के पकड़े जाने पर उसके ठिकानों पर छापे लगते रहे हैं, पर कार्रवाई अक्सर ‘ऊपरी सेटिंग’ के चलते आगे नहीं बढ़ पाई।

क्या आगे और सख्ती होगी?

वर्तमान स्थिति में राजनीतिक व प्रशासनिक नजर रखने के बावजूद आधिकारिक तौर पर पूछताछ और नई FIR की पुष्टि अभी बाकी है। हालांकि बाजार और सूत्रों में जो चर्चा तेज हुई है, वह यही है कि अगर रिलीव का निर्णय वापिस नहीं लिया गया तो बड़े सिंडिकेट पर कार्रवाई कमजोर पड़ सकती है।

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One thought on “आगरा में नकली दवाओं का खेल! कार्रवाई के बीच अधिकारी को हटाए जाने की चर्चा, ‘फेक मेडिसिन का बादशाह’ बचाने को हुई कवायद”
  1. […] आगरा।आख़िरकार वह घड़ी आ ही गई, जिसका इंतजार दवा बाजार के ईमानदार कारोबारियों को बरसों से था। दशकों से नकली दवाइयों के साम्राज्य पर राज करने वाले “फेक मेडिसिन के बादशाह” का किला ढह गया। https://www.dnakhabarbharti.in.net/agra-fake-medicine-badshah-huge-suspect/ […]

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