उत्तर प्रदेश

आज़ादी के 78 साल बाद भी चारपाई पर अस्पताल पहुंचती हैं जिंदगियां

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फतेहाबाद। विकास के बड़े-बड़े दावे और गांव-गांव सड़क बनाने के सरकारी ऐलान उस वक्त खोखले नजर आते हैं, जब फतेहाबाद का प्रतापपुरा नीचाखेड़ा गांव जैसी हकीकत सामने आती है। जहां कागजों पर विकास चरम पर बताया जाता है, वहीं यह गांव आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

यहां मंगलवार को गर्भवती पूजा देवी को अचानक प्रसव पीड़ा हुई तो परिजनों ने एंबुलेंस बुलाई। लेकिन गांव तक सड़क न होने के कारण एंबुलेंस बीच रास्ते में ही रुक गई। मजबूर परिजनों ने महिला को चारपाई पर लिटाकर करीब 500 मीटर कीचड़ और ऊबड़-खाबड़ रास्ते से उठाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया। रास्ते भर महिला दर्द से तड़पती रही और परिजन सरकार और व्यवस्था को कोसते रहे।

78 साल से सड़क का नामोनिशान नहीं

ग्रामीणों ने बताया कि आज़ादी के बाद से अब तक गांव तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ। हर चुनाव में सड़क का वादा मिलता है, पर नतीजा सिर्फ फाइलों तक सीमित है। लगभग 40 घरों और करीब 250 की आबादी आज भी एंबुलेंस, स्वास्थ्य सेवाओं और दूसरी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

अन्य महिलाएं भी खतरे में

गांव की गर्भवती महिलाएं सुनीता, गायत्री और उर्मिला भी इसी जोखिम में हैं। बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं, जब यह पगडंडी दलदल में बदल जाती है।

गांव के बुजुर्ग रामनिवास ने कहा, “हर चुनाव में नेता यहां आते हैं, सड़क बनाने का वादा करते हैं, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। हमारी पीढ़ी बूढ़ी हो गई, पर सड़क सिर्फ कागजों पर बनी।”

युवक दीपक ने गुस्से में कहा, “सरकारें कहती हैं कि गांव-गांव सड़क पहुंच गई है, लेकिन हमारे यहां एंबुलेंस तक नहीं आ पाती। यह कैसा विकास है?”

महिला गायत्री ने पीड़ा जताई, “हमारी जान खतरे में रहती है। गर्भवती होने पर अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल है। कोई भी बीमारी हो जाए, मरीज को चारपाई पर उठाकर ले जाना पड़ता है।”

ग्रामीण जितेंद्र ने चेतावनी दी, “अगर जल्द सड़क का निर्माण नहीं किया गया तो हम सब मिलकर गांव छोड़ देंगे। अब और इंतजार नहीं होगा।”

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

ग्रामीणों का कहना है कि 78 साल से सिर्फ झूठे वादे सुन रहे हैं। शिकायतों के बाद भी अधिकारी और जनप्रतिनिधि कोई कदम नहीं उठाते। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द सड़क नहीं बनी तो वे सामूहिक पलायन करेंगे।सरकारी दावों और कागजी योजनाओं के बीच यह गांव आज़ादी के 78 साल बाद भी विकास की प्रतीक्षा में है।

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