बैंक मैनेजर हत्याकांड का फैसला:: पत्नी प्रियंका और साले कृष्णा को उम्रकैद, ससुर बृजेन्द्र रावत को सात साल की सजा
आगरा.।बैंक मैनेजर सचिन उपाध्याय हत्याकांड में सोमवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अपर जिला जज नितिन कुमार ठाकुर की अदालत ने मृतक की पत्नी प्रियंका रावत और साले कृष्णा रावत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, ससुर और कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेंद्र सिंह रावत को साक्ष्य मिटाने के अपराध में सात वर्ष की कैद दी गई है। फैसला सुनाए जाने के बाद तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया।
घटना का पूरा घटनाक्रम
ताजगंज क्षेत्र की रामरघु एग्जाटिका कॉलोनी में रहने वाले बैंक मैनेजर सचिन उपाध्याय की 11 अक्तूबर 2023 को हत्या कर दी गई थी। 12 अक्तूबर की शाम को परिजनों और पुलिस को घटना की जानकारी मिली। उस समय ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था।
लेकिन 13 अक्तूबर को डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि की। इसके बाद मृतक के पिता केशवदेव शर्मा (निवासी टीकतपुरा, थाना मंसुखपुरा) ने 18 अक्तूबर 2023 को थाना ताजगंज में हत्या, साजिश और सबूत मिटाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया।
एफआईआर में तीनों — बृजेंद्र सिंह रावत, उनकी बेटी प्रियंका रावत और बेटे कृष्णा रावत — को नामजद किया गया था।
गिरफ्तारी से लेकर सजा तक की पूरी कहानी
पुलिस ने 20 अक्तूबर 2023 को कृष्णा रावत को जेल भेजा था।
29 अक्तूबर 2023 को बृजेंद्र सिंह रावत और प्रियंका रावत को प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया।
वर्ष 2024 में बृजेंद्र रावत को हाईकोर्ट से बेल मिल गई।
वर्ष 2025 में प्रियंका और कृष्णा रावत को भी जमानत मिल चुकी थी।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 14 अगस्त 2025 को कृष्णा रावत को पुनः जेल भेजा गया, जहां से अब तक वह निरुद्ध है।
कोर्ट ने क्या कहा
अपर जिला जज नितिन कुमार ठाकुर ने कहा कि अभियोजन पक्ष के प्रस्तुत साक्ष्य और गवाही से यह साबित होता है कि प्रियंका और कृष्णा ने मिलकर सचिन उपाध्याय की हत्या की, जबकि बृजेंद्र सिंह रावत ने सबूत मिटाने का प्रयास किया।
कोर्ट ने प्रियंका और कृष्णा को आजीवन कारावास, और बृजेंद्र सिंह रावत को सात वर्ष की कैद की सजा सुनाई।
कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
