आगरा। प्रोफेसर गौतम जैसवार पर एक शोध छात्रा द्वारा लगाए गए शारीरिक शोषण के गंभीर आरोपों के मामले में अब कई नए मोड़ सामने आ रहे हैं।

पहले पत्नी डॉ. कविता चौधरी ने मीडिया के सामने अपने पति के पक्ष में बयान दिया, वहीं अब उनके वकील सुरेश चंद सोनी ने भी FIR और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

पत्नी बोलीं – “मेरे पति को ब्लैकमेल कर फंसाया गया”

डॉ. कविता ने मीडिया से कहा —

“वो लड़की पीएचडी का काम करने आई थी। उसने मेरे पति को भावनात्मक रूप से फंसा लिया। बीमारी के बहाने बाहर लेकर जाती थी और फिर ब्लैकमेल करने लगी। पैसे मांगती रही और जब बात नहीं बनी तो झूठे आरोप लगा दिए।”

उन्होंने बताया कि छात्रा का उनके घर आना-जाना था और वह परिवार के सदस्यों से भी परिचित थी।

कविता ने कहा

“हम उसे परिवार का हिस्सा समझते थे। इसलिए कभी शक नहीं किया। लेकिन उसने चालाकी से साक्ष्य जुटाकर मेरे पति को फंसा दिया।”

“बीमारी के बहाने बाहर ले जाकर झूठा केस बनाया”

कविता ने बताया कि उनके पति को सोरायसिस (त्वचा रोग) की समस्या थी।

“वो इलाज के बहाने बाहर ले जाती थी — बरसाने और दूसरी जगहों पर। वहीं उसने सबूत जुटाए और वापसी पर पैसों की डिमांड शुरू कर दी।”

उन्होंने दावा किया कि छात्रा द्वारा दी गई ऑडियो और चैट्स ब्लैकमेलिंग का हिस्सा हैं।

“व्हाट्सएप चैट उसके फोन की, लेकिन गलती से डेस्कटॉप पर रह गई”

कविता ने बताया

“वो हमारे पति के कंप्यूटर पर रिसर्च का काम करती थी। शायद लॉगआउट नहीं किया, इसलिए उसके चैट खुले रह गए। वहीं से पता चला कि वो और लोग मिलकर साजिश रच रहे थे।”

वकील सुरेश चंद सोनी बोले – “एफआईआर में विरोधाभास, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन तोड़ी”

प्रोफेसर के वकील सुरेश चंद सोनी ने कहा —

“माननीय सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि अगर लड़की को पहले से पता है कि पुरुष शादीशुदा है, तो शादी का झांसा देने का मामला अपराध नहीं बनता।
इस केस में लड़की जानती थी कि प्रोफेसर शादीशुदा हैं, फिर भी एफआईआर दर्ज हुई यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना और कंटेम्प्ट के दायरे में आता है।”

“एफआईआर जल्दबाजी में लिखी गई, कई तथ्य मेल नहीं खाते”

वकील सोनी ने कहा

“एफआईआर में ऐसी बातें लिखी हैं, जिनसे लगता है कि इसे किसी पुलिस अधिकारी या राजनीतिक दबाव में तैयार किया गया।
उसमें लिखा है कि हाथापाई हुई और मोबाइल तोड़ा गया जबकि मोबाइल टूटा नहीं और किसी को चोट नहीं आई।
एफआईआर की आखिरी लाइन में लिखा है कि ‘अब वो मुझसे शादी से इंकार कर रहा है।’ जब उसे पहले से पता था कि वह शादीशुदा है, तो यह खुद एफआईआर का विरोधाभास है।”

“पहले जमानत, फिर सुप्रीम कोर्ट में कंटेम्प्ट याचिका”

वकील ने आगे कहा

“हम पहले जमानत याचिका दायर कर रहे हैं। जमानत मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अवमानना (कंटेम्प्ट) याचिका दाखिल करेंगे। पुलिस ने जिस तरह से दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है, वह कानून का दुरुपयोग है।”

कविता चौधरी की अपील – “मामले की निष्पक्ष जांच हो”

कविता ने कहा

“यह एकतरफा कहानी नहीं है। मेरे पति निर्दोष हैं और उन्हें फंसाने की कोशिश हो रही है। पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग करती हूं।”


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