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ताजमहल के आसपास ठगी का बढ़ता जाल,: पर्यटकों की सुरक्षा पर सवाल

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आगरा | विश्व प्रसिद्ध एक ओर भारत की शान है, तो दूसरी ओर इसके आसपास सक्रिय लवकों, फर्जी गाइडों और अवैध दुकानदारों के कारण पर्यटक आए दिन ठगी का शिकार हो रहे हैं। देशी-विदेशी पर्यटकों से मनमाने दाम वसूलना, जबरन सामान बिकवाना और भ्रमित कर पैसे ऐंठना अब आम समस्या बन चुकी है।


 ठगी से बिगड़ रही आगरा की छवि

पर्यटकों की शिकायत है कि ताजमहल के पूर्वी व पश्चिमी गेट, ताजगंज क्षेत्र और शिल्पग्राम के आसपास:

  • फर्जी गाइड जबरन सेवाएं देते हैं
  • बिना रेट लिस्ट के सामान बेचा जाता है
  • पार्किंग व एंट्री पर अवैध वसूली होती है
  • नकली हस्तशिल्प ऊंचे दामों पर बेचे जाते हैं

इन घटनाओं से आगरा की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंच रहा है।


 पूर्व कमिश्नर की पहल बनी थी मिसाल

पूर्व मंडलायुक्त के कार्यकाल में इस समस्या से निपटने के लिए कई सख्त कदम उठाए गए थे। उस समय प्रशासन ने:

दुकानों पर रेट लिस्ट अनिवार्य की
लाइसेंस प्राप्त गाइड व्यवस्था लागू की
फर्जी गाइडों पर कार्रवाई की
पर्यटन पुलिस को सक्रिय किया

इन प्रयासों से काफी हद तक ठगी पर रोक लगी थी।


 अब क्यों ढीली पड़ गई व्यवस्था?

वर्तमान में यह व्यवस्था कमजोर होती नजर आ रही है। स्थानीय लोगों और पर्यटकों का कहना है कि:

  • कई दुकानदार रेट लिस्ट छिपा लेते हैं
  • फर्जी गाइड फिर से सक्रिय हो गए हैं
  • नियमित जांच नहीं हो पा रही
  • शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई नहीं होती

इस कारण ठगों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।


 पर्यटन पर पड़ रहा नकारात्मक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति बनी रही, तो:

विदेशी पर्यटकों का भरोसा कम होगा
आगरा की पर्यटन अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी
ईमानदार व्यापारियों को नुकसान होगा

पर्यटन विभाग के अनुसार, प्रतिदिन हजारों पर्यटक ताजमहल देखने आते हैं, लेकिन खराब अनुभव के कारण कई लोग दोबारा आने से बचते हैं।


 क्या हो सकते हैं समाधान?

प्रशासनिक स्तर पर निम्न कदम फिर से लागू किए जाने की जरूरत है:

🔹 डिजिटल रेट लिस्ट व QR सिस्टम
🔹 रोज़ाना निरीक्षण अभियान
🔹 फर्जी गाइड पर सख्त कार्रवाई
🔹 हर गेट पर हेल्पलाइन बोर्ड
🔹 CCTV निगरानी व्यवस्था

इन उपायों से ठगी पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।


 जनता की मांग: फिर से सख्ती जरूरी

स्थानीय नागरिकों और पर्यटन से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि पूर्व की तरह सख्ती बरती जाए, तो स्थिति सुधर सकती है।

स्थानीय व्यापारी का कहना:
“ईमानदार दुकानदार भी ठगों की वजह से बदनाम हो रहे हैं। प्रशासन को फिर से कड़ा कदम उठाना चाहिए।”

पर्यटक की प्रतिक्रिया:
“ताजमहल देखने आए थे, लेकिन बाहर की परेशानी ने अनुभव खराब कर दिया।”


 निष्कर्ष

ताजमहल केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि भारत की पहचान है। इसके आसपास बढ़ती ठगी न केवल पर्यटकों के साथ अन्याय है, बल्कि देश की छवि पर भी सवाल खड़े करती है। यदि प्रशासन पूर्व की तरह सख्त नीति अपनाए, तो यह समस्या दोबारा नियंत्रित की जा सकती है।

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