आगरा असलाह लाइसेंस कांड में बड़ा राज़! सभी के पास डुप्लीकेट लाइसेंस, असली दस्तावेज गायब: अलग-अलग बहाने, लेकिन पैटर्न एक जैसा, जांच एजेंसियों को संगठित रैकेट की आशंका
आगरा।आगरा में सामने आए अवैध असलाह लाइसेंस कांड ने अब बेहद चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जिन्होंने खुद जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है।
अब तक जांच के दायरे में आए सभी मामलों में एक समान सच्चाई सामने आई है हर व्यक्ति के पास डुप्लीकेट असलाह लाइसेंस तो मिला, लेकिन किसी के पास भी मूल यानी प्रथम लाइसेंस मौजूद नहीं है। यही समानता अब पूरे मामले को साधारण गड़बड़ी नहीं बल्कि सुनियोजित खेल की ओर इशारा कर रही है।
जांच में सामने आया कि हर आरोपी ने मूल लाइसेंस गायब होने की अलग कहानी सुनाई।जैद ने लाइसेंस चोरी होने की बात कही।अरशद ने दावा किया कि उसका मूल लाइसेंस फट गया था।शोभित और गौतम ने लाइसेंस गिर जाने की जानकारी दी।जबकि राजेश बघेल का लाइसेंस जांच में पूरी तरह फर्जी पाया गया।
कहानियां अलग-अलग हैं, लेकिन जांच अधिकारियों के अनुसार सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सभी मामलों में मूल लाइसेंस और उसकी कॉपी तक कैसे गायब हो गई। सामान्य परिस्थितियों में लाइसेंस रिकॉर्ड विभागीय फाइलों में सुरक्षित रहता है, ऐसे में एक साथ सभी मूल दस्तावेजों का गायब होना संदेह को और गहरा कर रहा है।
सूत्रों की मानें तो जांच अब उस “कॉमन लिंक” पर केंद्रित हो गई है, जहां से डुप्लीकेट लाइसेंस जारी होने की पूरी प्रक्रिया संचालित हुई हो सकती है। आशंका जताई जा रही है कि डुप्लीकेट लाइसेंस के नाम पर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा कर अवैध हथियारों को वैध दिखाने का नेटवर्क सक्रिय था।
जांच एजेंसियां अब पुराने रिकॉर्ड, लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों और दस्तावेजी प्रक्रिया की परत-दर-परत पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह कड़ी जुड़ गई तो आगरा ही नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर तक फैले बड़े रैकेट का खुलासा हो सकता है।
फिलहाल इस कांड ने प्रशासनिक तंत्र और लाइसेंस प्रणाली दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और जांच की दिशा अब सीधे उस नेटवर्क की ओर बढ़ रही है, जो पर्दे के पीछे से पूरा खेल संचालित करता रहा।
