मूल उद्देश्य से भटकता ताज महोत्सव,: अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल
संवाददाता, आगरा। पर्यटन को बढ़ावा देने और आगरा की कला-संस्कृति को पहचान दिलाने के उद्देश्य से शुरू हुआ ताज महोत्सव इस बार अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। वर्ष 1992 में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इस महोत्सव की शुरुआत स्थानीय हस्तशिल्पियों, कलाकारों और पारंपरिक कलाओं को मंच देने के लिए की थी, लेकिन मौजूदा आयोजन में व्यवस्थाओं को लेकर पर्यटन कारोबारियों ने नाराजगी जताई है।
ताज महोत्सव की शुरुआत इस सोच के साथ हुई थी कि ताजमहल देखने आने वाले देश-विदेश के पर्यटक आगरा की संस्कृति, लोककलाओं और हस्तशिल्प को करीब से जान सकें। स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और उन्हें बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही शाम के समय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए शहर के पर्यटन को नया आकर्षण देना इसका मुख्य उद्देश्य रहा है।
पर्यटन संस्थाओं का कहना है कि इस बार आयोजन में स्थानीय सहभागिता पहले जैसी नजर नहीं आई। कई संस्थाओं को न तो आयोजन से जुड़ी जानकारी समय पर मिली और न ही कार्यक्रमों के पास उपलब्ध कराए गए। कार्यक्रम के ब्रॉशर तक समय से जारी नहीं हुए, जिससे पर्यटकों को जानकारी देने में दिक्कत आ रही है।
कारोबारियों ने आगरा किला में साउंड एंड लाइट शो के नियमित संचालन न होने और उसके प्रचार-प्रसार की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि जब महोत्सव का मकसद ही पर्यटन को बढ़ावा देना है, तो बुनियादी व्यवस्थाओं में कमी चिंता का विषय है।
शनिवार को कुबेरपुर में प्रदेश के पर्यटन मंत्री एवं प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह के आगमन पर पर्यटन कारोबारियों ने उनसे मुलाकात कर समस्याएं रखीं। मंत्री ने अधिकारियों को प्रचार सामग्री जल्द तैयार कराने और व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए हैं। उन्होंने 27 फरवरी को ताज महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होकर पर्यटन कारोबारियों के साथ बैठक करने की बात कही।
पर्यटन से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि महोत्सव को उसके मूल उद्देश्य के अनुसार स्थानीय कलाकारों और पर्यटन उद्योग की भागीदारी के साथ आयोजित किया जाए, तो ताज महोत्सव फिर से अपनी पुरानी पहचान हासिल कर सकता है।
