अधूरी कार्रवाई पर फटकार, रिपोर्ट को बताया “आंखों में धूल”; चेयरपर्सन को दोबारा तलब, 6 अप्रैल को अहम सुनवाई


मेरठ, 3 अप्रैल।शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माणों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद और राज्य सरकार को अंतिम चेतावनी दी है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि अवैध निर्माणों पर कोई ढील नहीं दी जाएगी और सभी निर्माणों को हटाना ही होगा।

यह आदेश 2 अप्रैल 2026 को अवमानना याचिका संख्या 877/2025 (C.A. No. 14604/2024) में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ द्वारा पारित किया गया।


पुराने आदेशों की पुनः पुष्टि

सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी 2026 के आदेश और 17 दिसंबर 2024 के ऐतिहासिक फैसले को दोहराते हुए कहा कि देशभर में अवैध व्यावसायिक निर्माण, विशेषकर आवासीय प्लॉट पर, किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। अदालत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अनुपालन न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होगी।


अधूरी कार्रवाई पर नाराजगी

कोर्ट ने पाया कि परिषद द्वारा केवल आंशिक कार्रवाई की गई है और बड़ी संख्या में अवैध निर्माण अब भी जस के तस खड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार कुल 860 अवैध प्रॉपर्टी चिन्हित की गईं, जिनमें से मात्र एक निर्माण (प्लॉट 661/6) को हटाया गया।

इसके अलावा 144 स्थानों पर केवल व्यावसायिक गतिविधि बंद कराई गई, जबकि 215 मालिकों ने भविष्य में ऐसा करने की सहमति जताई। बावजूद इसके 501 प्रॉपर्टी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।


स्टेटस रिपोर्ट पर सख्त टिप्पणी

अदालत ने परिषद द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट को “absolute eyewash” यानी आंखों में धूल झोंकने वाला करार दिया। कोर्ट ने कहा कि यह रिपोर्ट वास्तविक कार्रवाई को नहीं दर्शाती और जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है।


कमिश्नर के आदेश पर सवाल

सबसे अधिक नाराजगी मेरठ के पूर्व कमिश्नर द्वारा 27 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश पर जताई गई, जिसमें ध्वस्तीकरण रोकने और क्षेत्र को “मार्केट स्ट्रीट” घोषित करने की बात कही गई थी।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा आदेश पारित किया जाना बेहद चिंताजनक है और यह न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना है।


चेयरपर्सन की व्यक्तिगत पेशी

1 अप्रैल की सुनवाई में संतोषजनक कार्रवाई न होने पर अदालत ने परिषद के चेयरपर्सन पी. गुरुप्रसाद को व्यक्तिगत रूप से 2 अप्रैल को पेश होने का निर्देश दिया था। गुरुप्रसाद कोर्ट में उपस्थित हुए और अपनी ओर से स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की।


अदालत का नया सख्त आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने चेयरपर्सन को 4 अप्रैल 2026 तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें निम्न बिंदुओं को स्पष्ट करना अनिवार्य होगा:

  • अब तक की गई कार्रवाई का पूरा विवरण
  • सभी 860 अवैध निर्माणों को हटाने की ठोस कार्ययोजना और समयसीमा
  • स्वीकृत नक्शों की वैधता और अनुपालन की स्थिति
  • कितने भवन स्वीकृत मानकों के अनुसार निर्मित हैं

साथ ही, इस हलफनामे की प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को अग्रिम रूप से उपलब्ध कराना होगा।


6 अप्रैल को अहम सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को सुबह 10:30 बजे होगी। इसे सूची में पहले नंबर पर रखा गया है।
इस दौरान चेयरपर्सन पी. गुरुप्रसाद को पुनः व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा। साथ ही, मेरठ के पूर्व कमिश्नर रिशिकेश भास्कर यशोद को भी अदालत ने तलब किया है।


अंतिम चेतावनी

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह “आखिरी मौका” है। यदि पूर्ण अनुपालन नहीं हुआ तो न केवल अवमानना की सजा दी जाएगी, बल्कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी तय मानी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख से साफ हो गया है कि शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में मौजूद सभी 860 अवैध निर्माणों को हटाना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार का रेगुलराइजेशन या प्रशासनिक आदेश अब राहत नहीं दे सकेगा।

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