शासन से मंजूर दो पुल परियोजनाओं पर CEC की आपत्ति,: जनहित पर औद्योगिक हित भारी पड़ने का सवाल
आगरा। आगरा के ग्रामीण और औद्योगिक इलाकों में आवागमन आसान बनाने के लिए शासन से मंजूर दो अहम पुल परियोजनाओं पर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) की निरीक्षण रिपोर्ट ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। रहनकलां-रायपुर-बमरौली कटारा मार्ग पर समोगर घाट में यमुना पर प्रस्तावित दो लेन पुल और नुनिहाई-प्रकाश नगर रेलवे ओवरब्रिज (ROB) को CEC ने मौजूदा परिस्थितियों में जरूरी नहीं माना है। दोनों परियोजनाओं पर आगे काम न बढ़ाने की राय दी गई है।
जनता के लिए राहत का दावा, CEC ने जरूरत पर उठाया सवाल
रहनकलां-रायपुर-बमरौली कटारा मार्ग पर यमुना के समोगर घाट पर प्रस्तावित दो लेन पुल को शासन से मंजूरी मिल चुकी है। करीब 93 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से आसपास के गांवों को सीधा संपर्क मिलने और ग्रामीणों की दूरी व समय कम होने की उम्मीद थी।
लेकिन CEC ने 29 जुलाई 2026 को स्थल का निरीक्षण करने के बाद परियोजना की उपयोगिता पर सवाल उठाया। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रस्तावित स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर इनर रिंग रोड पर पहले से पुल मौजूद है। समिति ने करीब 40 मिनट तक मौके का निरीक्षण किया और इस दौरान एक भी चार पहिया वाहन नहीं देखा।
CEC ने क्षेत्र में कम आबादी और कम यातायात का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा पुल से क्षेत्र की जरूरत पूरी हो सकती है। समिति की राय में प्रस्तावित पुल की जरूरत नहीं है।
नुनिहाई ROB पर भी औद्योगिक इकाइयों की आपत्ति बनी आधार
दूसरी परियोजना नुनिहाई इंडस्ट्रियल एरिया और प्रकाश नगर के बीच दो लेन ROB की है। इस परियोजना को भी शासन से प्रशासकीय और वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। इसका उद्देश्य रेलवे फाटक और आसपास के क्षेत्र में आवागमन को सुगम बनाना था। प्रकाश नगर ROB से करीब ढाई से तीन लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
हालांकि CEC ने 30 जुलाई 2026 को निरीक्षण के बाद ROB को भी उचित नहीं माना। समिति ने कम यातायात, पहले से मौजूद दो अंडरपास और औद्योगिक क्षेत्र की परिस्थितियों का हवाला दिया।
औद्योगिक हितों की चिंता, लेकिन सवाल जनता के हित का
CEC की रिपोर्ट में नुनिहाई औद्योगिक क्षेत्र के इकाई संचालकों की ROB को लेकर आपत्ति का भी जिक्र है। उनका कहना था कि निर्माण के बाद कच्चा माल लाने और तैयार माल ले जाने वाले भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इससे फाउंड्री इकाइयों के रोजमर्रा के काम पर असर पड़ने की आशंका जताई गई।
यहीं से जनहित बनाम औद्योगिक हित का सवाल खड़ा होता है। शासन ने जिन परियोजनाओं को क्षेत्रीय लोगों की आवाजाही और संपर्क सुविधा से जोड़कर मंजूरी दी, उनके खिलाफ औद्योगिक इकाइयों की आपत्ति भी सामने आई। CEC की रिपोर्ट में इन परिस्थितियों को परियोजना की उपयोगिता पर विचार करते समय महत्व दिया गया।
विधायक ने कहा- कानूनी राय ले रहे, दोबारा CEC में रखेंगे प्रस्ताव
एत्मादपुर क्षेत्र से विधायक धर्मपाल सिंह ने कहा कि वह इस पूरे मामले में कानूनी राय ले रहे हैं। विधायक के अनुसार दोनों परियोजनाएं क्षेत्र की जनता के हित से जुड़ी हैं और जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव को दोबारा CEC के समक्ष भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि जनता की जरूरत और क्षेत्र के विकास को देखते हुए परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।
सवाल यह कि विकास की कसौटी क्या होगी?
CEC की रिपोर्ट के बाद अब सवाल केवल पुल बनने या न बनने का नहीं है। सवाल यह भी है कि विकास परियोजनाओं की उपयोगिता तय करते समय मौजूदा यातायात के साथ भविष्य की आबादी, ग्रामीण संपर्क, जाम और आम लोगों की सुविधा को कितना महत्व दिया जाएगा।
शासन से स्वीकृति मिलने के बाद इन परियोजनाओं पर रोक जैसी स्थिति ने क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है। अब विधायक की ओर से कानूनी राय लेने और प्रस्ताव को दोबारा CEC में रखने की बात के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
