आगरा

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा फैसला—: नियमों को ताक पर रखकर बना अवैध निर्माण ‘शमन’ के योग्य नहीं, चलेगा बुलडोज़र

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Manvendra Malhotra

Agra: भारत के उच्चतम न्यायालय ने देशभर में अवैध निर्माणों और रिहायशी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों पर अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि जो निर्माण नियमों को पूरी तरह दरकिनार (Total violation) करके किए गए हैं, उन्हें किसी भी सूरत में ‘शमन’ (Regularization) के जरिए वैध नहीं किया जा सकता।

यह आदेश विशेष रूप से आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) और आवास विकास परिषद जैसे विभागों के लिए एक बड़ी चेतावनी है, जहाँ अक्सर शमन के नाम पर अवैध निर्माणों को संरक्षण मिलने के आरोप लगते रहे हैं।


1. नियमों को दरकिनार किया तो ‘शमन’ नामुमकिन

अदालत ने अपने आदेश में यह साफ कर दिया है कि ‘शमन’ का अर्थ नियमों की धज्जियां उड़ाना नहीं है।

  • अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश: सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार प्रत्येक अनधिकृत निर्माण को अनिवार्य रूप से ध्वस्त किया जाना चाहिए।
  • शमन के बहाने देरी पर नाराजगी: सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार अधिकारी शमन के आवेदनों का बहाना बनाकर अवैध ढांचों को नहीं गिरा रहे हैं, जो सीधे तौर पर कोर्ट की अवमानना (Contempt) है।
  • 90 दिनों का अल्टीमेटम: सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार यदि किसी ने शमन या सुधार के लिए आवेदन किया भी है, तो अधिकारियों को उसे अधिकतम 90 दिनों के भीतर निपटाना होगा। यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध है और सुधारा नहीं जा सकता, तो उसे गिराना ही एकमात्र विकल्प है।

2. आवासीय स्थलों पर कमर्शियल कार्यों पर पूर्ण पाबंदी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार किसी भी अनधिकृत इमारत (चाहे वह आवासीय हो या कमर्शियल) में व्यापार करने के लिए कोई लाइसेंस या अनुमति नहीं दी जाएगी।

इससे आगरा की उन रिहायशी कॉलोनियों में हड़कंप मचना तय है, जहाँ बिना नक्शा पास कराए शोरूम और दुकानें संचालित हो रही हैं।


3. प्रमुख निर्देश जो बदल देंगे निर्माण के नियम

  • कम्प्लीशन सर्टिफिकेट अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार बिजली, पानी और सीवरेज के स्थाई कनेक्शन तभी मिलेंगे जब मालिक के पास वैध कम्प्लीशन सर्टिफिकेट होगा।
  • जोनल प्लान का कड़ाई से पालन: सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार विकास कार्य केवल तय जोनल प्लान और जमीन के आवंटित उपयोग (Usage) के अनुसार ही हो सकता है।
  • साइट पर नक्शा प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार निर्माण के दौरान स्वीकृत नक्शे की प्रति साइट पर लगाना अनिवार्य होगा।

4. दोषी अधिकारियों पर होगी सीधी जेल और विभागीय कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार यदि कोई अधिकारी नियमों के विरुद्ध जाकर गलत तरीके से प्रमाण पत्र जारी करता है या अवैध निर्माण को शमन के नाम पर बचाता है, तो उसके खिलाफ तत्काल विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


कोर्ट का सख्त संदेश

“अधिकारी अगर आदेशों का कड़ाई से पालन करें, तो अदालतों में मुकदमों का बोझ अपने आप कम हो जाएगा। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”


 

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