आगरा में थर्ड डिग्री का आरोप:: किरावली थाने के खिलाफ NHRC में शिकायत, युवक के दोनों पैर टूटने का दावा
आगरा। थाना किरावली में पुलिस हिरासत के दौरान युवक को थर्ड डिग्री देकर दोनों पैर तोड़ने के गंभीर आरोपों को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नरेश पारस ने आयोग से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र टीम गठित करने, पीड़ित के बयान दर्ज कराने, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने और पीड़ित को इलाज व सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
नरेश पारस के अनुसार, किरावली थाना क्षेत्र के गांव करहारा में 5 जून 2025 को 58 वर्षीय किसान वनवीर सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। इसी मामले में राजू नामक युवक को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया। आरोप है कि पुलिस ने उससे जबरन हत्या कबूल कराने के लिए दो दिनों तक अवैध हिरासत में रखकर अमानवीय यातनाएं दीं।
वही पीड़ित राजू का आरोप है कि उसे थाने के एक कमरे में ले जाकर शाल से दोनों पैरों को बांधकर डंडे के सहारे उल्टा लटका दिया गया। थाना प्रभारी नीरज कुमार की मौजूदगी में दो दरोगा और एक सिपाही ने बेरहमी से पिटाई की। उसके पैरों के तलवों पर डंडे मारे गए, जिससे लकड़ी के चार और एक प्लास्टिक का डंडा टूट गया। चीखने पर उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया गया और रातभर उसे पीटा गया।
राजू के अनुसार, बेहोश होने और पैरों में तेज सूजन आने के बाद पुलिस उसे किरावली के अस्पताल लेकर पहुंची। जांच में उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है और फिलहाल उसके दोनों पैरों में प्लास्टर चढ़ा हुआ है। परिजनों के पहुंचने पर उसने पूरी आपबीती बताई, जिसके बाद मामला सार्वजनिक हुआ।
मामले के तूल पकड़ने पर पुलिस कमिश्नर ने कड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए एसीपी राम प्रवेश गुप्ता का तत्काल तबादला कर दिया है। वहीं, एस ओ नीरज कुमार , एक सब-इंस्पेक्टर धर्मवीर और एक सिपाही रवि मलिक को निलंबित किया गया है। इसके बावजूद मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
यह मामला पुलिस हिरासत में थर्ड डिग्री और मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की निगाहें राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
