UP में कोडीन कफ सिरप पर सबसे बड़ा क्रैकडाउन: 52 जिलों में जांच, 161 फर्मों पर FIR, 85 गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश में नशे के कारोबार के खिलाफ योगी सरकार का बड़ा एक्शन जारी है। कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध सप्लाई चेन को ध्वस्त करने के लिए तीन महीने पहले शुरू हुए अभियान में अब बड़े परिणाम सामने आए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने राज्य के 52 जिलों में सघन जांच करते हुए 161 फर्मों पर FIR दर्ज कराई है। पुलिस और एसटीएफ ने अब तक 85 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय और डायवर्जन पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद FSDA ने झारखंड, हरियाणा, हिमाचल और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में जांच और साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की।
फार्मा कंपनियों से लेकर सुपर स्टॉकिस्ट तक पहुंची कार्रवाई
जांच में सामने आया कि दिल्ली और रांची के सुपर स्टॉकिस्टों के जरिए थोक विक्रेताओं की एक समानान्तर वितरण श्रृंखला बनाई गई थी, जिसमें अधिकांश फर्में असली रिटेल मेडिकल स्टोर को आपूर्ति का प्रमाण तक पेश करने में असफल रहीं।
टीम ने केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, ग्वालियर से कोडीन फॉस्फेट के कोटा और उठान का रिकॉर्ड भी खंगाला। FSDA की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई ने इस अवैध नेटवर्क की परतें खोल दीं।
संदिग्ध बोतलें करोड़ों में
जांच में पाया गया कि
- 2.23 करोड़ से ज्यादा बोतलें फेन्सिडिल (ऐबोट)
- 73 लाख से ज्यादा बोतलें एस्कॉफ (लैबोरेट फार्मा)
- लगभग 25 लाख बोतलें अन्य कंपनियों की
राज्य में पहुंचाई गईं, जिनका चिकित्सीय उपयोग प्रमाणित नहीं हो पाया।
गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति जब्ती की तैयारी
FSDA ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर नशे से अर्जित संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई भी तेज करने के निर्देश दिए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों को सही ठहराते हुए आरोपियों की याचिकाओं को खारिज कर सख्त रुख दिखाया है।
सरकार अब थोक औषधि लाइसेंसिंग प्रणाली को और पारदर्शी और सख्त बनाने की तैयारी में है। वहीं, SIT की विस्तृत रिपोर्ट अगले महीने तक मुख्यमंत्री को सौंपे जाने की संभावना है।
