साइबर सुरक्षा और महिला सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला का भव्य आयोजन: मिशन शक्ति अभियान के तहत सूरसदन ऑडिटोरियम, आगरा में हुआ कार्यक्रम
आगरा
मंगलवार को ‘मिशन शक्ति अभियान’ के तहत ताजनगरी आगरा के सूरसदन ऑडिटोरियम में साइबर सुरक्षा और महिला सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला का भव्य आयोजन हुआ।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों और नागरिकों को बढ़ते साइबर अपराधों (Cyber Crimes) महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा (Online Safety) के प्रति जागरूक करना था।
कार्यशाला को तीन चरणों में आयोजित किया गया, जिसमें शहर के प्रमुख स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रक्षित टंडन, डीजीपी राजीव कृष्णा (लखनऊ)और पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार जैसे वक्ताओं ने युवाओं को डिजिटल युग की सुरक्षा के गुर सिखाए।
मुख्य वक्ताओं के प्रेरक संदेश
डीजीपी राजीव कृष्णा ने वर्चुअल माध्यम से विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा —
“साइबर सुरक्षा आज के डिजिटल युग की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। हर छात्र को यह समझना होगा कि इंटरनेट जितना अवसर देता है, उतना ही खतरा भी छिपा है।”
साइबर विशेषज्ञ रक्षित टंडन ने बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया फ्रॉड, ईमेल फिशिंग और पासवर्ड सिक्योरिटी के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने छात्रों से कहा —
“साइबर अपराध से डरें नहीं, जागरूक बनें। किसी भी फ्रॉड की स्थिति में तुरंत **1930** पर कॉल करें और साइबर सेल से संपर्क करें।”
पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार का सख्त संदेश
कमिश्नर दीपक कुमार (IPS) ने कहा कि **“डिजिटल अरेस्ट”** जैसी कोई प्रक्रिया पुलिस विभाग में नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि —
“पुलिस किसी जांच या केस में पैसे नहीं मांगती। अगर कोई कॉल या मैसेज ऐसा करे तो समझिए यह फ्रॉड है। तुरंत इसकी शिकायत करें।”
उन्होंने कहा कि शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अपराधी मिनटों में पैसों को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है।
तीन चरणों में हुआ साइबर अवेयरनेस प्रोग्राम
पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया कि इस जागरूकता अभियान को तीन हिस्सों में बाँटा गया है —
- पहले सेशन में छात्रों को साइबर सुरक्षा की जानकारी दी गई,
- दूसरे में बैंकर्स, इंडस्ट्रियलिस्ट और सपोर्टर्स को शामिल किया गया,
- तीसरे सेशन में पुलिस के इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर्स (IOs) को प्रशिक्षित किया गया।
उन्होंने कहा कि —
“हमारा उद्देश्य है कि यह साइबर कैंपेन आगरा के घर-घर तक पहुँचे, ताकि हर व्यक्ति को साइबर के प्रति जागरूक किया जा सके।”
छात्राओं ने साझा किए अपने अनुभव
सेंट फ्रांसिस कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा **जन्नत आहूजा** ने कहा —
“सच कहूँ तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह इतना शैक्षिक होगा। हमें साइबर बुलिंग, फ्रॉड और सुरक्षा के बारे में बहुत कुछ नया जानने को मिला। ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से होने चाहिए ताकि और छात्र लाभ उठा सकें।”
सेंट पॉल स्कूल की छात्रा **प्रियंदा वकील** ने कहा —
“हमें फेक ऐप्स और हानिकारक एपीके फाइल्स के बारे में बताया गया। ये हमारी प्राइवेसी और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरनाक हैं। मैं अब कभी किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करूंगी और अपने दोस्तों को भी सावधान करूंगी।”
साइबर युग में जागरूकता ही सुरक्षा है
विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों और महिलाओं को **साइबर साक्षर (Cyber Literate)** बनाना समय की जरूरत है। सोशल मीडिया, गेमिंग और डिजिटल पेमेंट जैसे माध्यमों में सुरक्षा नियमों का पालन करके ही साइबर अपराधों से बचा जा सकता है।
रक्षित टंडन ने कहा —
“अगर आप सतर्क हैं, तो साइबर अपराधी सफल नहीं हो सकता। सुरक्षा की शुरुआत खुद से होती है।”
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