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आगरा साइबर क्राइम का सबसे बड़ा खुलासा: फर्जी क्रिप्टो वेबसाइट से 50 करोड़ की ठगी,: गैंग का एक सदस्य गिरफ्तार,छह आरोपी फरार

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आगरा। साइबर क्राइम पुलिस ने फर्जी क्रिप्टो करेंसी में इन्वेस्टमेंट के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये हड़पने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। वर्ष 2024 में पीड़ितों ने थाना साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई थी कि निवेश कराने के बाद जब उन्होंने रकम वापस मांगी तो कथित क्रिप्टो कंपनी के संचालक टालमटोल करके फरार हो गए। शिकायत पर की गई गहन जांच में एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ, जो कई राज्यों में फैला था।

फर्जी क्रिप्टो वेबसाइट ASTCOIN.BIZ के जरिए ठगे गए हजारों लोग

जांच में सामने आया कि गिरोह ने ASTCOIN.BIZ नाम से एक फर्जी क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म बनाया था। वेबसाइट पर कृत्रिम रूप से मुनाफा बढ़ाकर दिखाया जाता था। लोग जब तक लाभ का भ्रम देखते रहे, तब तक सेमिनार, रैफरल सिस्टम और चेन नेटवर्क के माध्यम से उन्हें लगातार निवेश के लिए प्रेरित किया गया। निवेशकों से 8,500 रुपये में आईडी बनवाई जाती थी और 1 लाख लगाने पर 7 लाख तक मिलने का झांसा दिया जाता था।

एडीशनल डीसीपी आदित्य कुमार ने बताया—पूरी मोडस ऑपरेंडी तकनीक और मनोविज्ञान का मिश्रण

एडीशनल डीसीपी आदित्य कुमार ने कहा कि यह गिरोह शुरू-शुरू में कुछ निवेशकों को थोड़े-बहुत लाभ देकर उनका भरोसा जीतता था। इसी भरोसे के आधार पर लोग अपने परिचितों को भी जोड़ते गए। जब करोड़ों रुपये इकट्ठे हो जाते, तो गिरोह ठिकाना बदल देता। पिछले 5–6 वर्षों में अलग-अलग राज्यों में लगभग 50 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने की बात सामने आई है। हजारों लोगों को इस फर्जी क्रिप्टो कॉइन “AST Coin” में इन्वेस्ट कराकर फंसाया गया।

फर्जी ईमेल और सर्वर के दम पर बनाया गया नकली क्रिप्टो साम्राज्य

गिरोह ने astcoinbiz@gmail.com नाम से ईमेल बनाकर Noida की एक कंपनी से वेबसाइट विकसित कराई। वेबसाइट का सर्वर Liquid Web से ASTSWAP यूज़रनेम पर लिया गया था, जिस पर पूरा नियंत्रण आरोपियों का था। सर्वर के माध्यम से वे निवेशकों का बैलेंस, प्रॉफिट और वॉलेट अमाउंट मनमर्जी से बढ़ा-घटा सकते थे। तकनीकी जांच में यह पूरा जाल पुलिस के हाथ लगा।

1500 से अधिक लोग हुए नेटवर्क का हिस्सा, बड़े होटल में सेमिनार आयोजित

आरोपियों ने आगरा और आसपास के जिलों में कई होटलों में बड़े सेमिनार आयोजित किए, जहां लगभग 1500 लोगों को नेटवर्क में जोड़ा गया। सेमिनार में इन्फ्लुएंसर के रूप में नरेन्द्र सिसौदिया, शुभम सिसौदिया, दीक्षा सिसौदिया और अजय जैसे लोग मंच से बड़े मुनाफे के दावे करते थे। महंगी गाड़ियों, बोनस और विदेशी यात्रा का लालच देकर लोगों को अपना एजेंट बनने पर मजबूर किया जाता था।

गैंग की संरचना तकनीकी विशेषज्ञ से लेकर नेटवर्क बनाने वाले सदस्य तक

एडीशनल डीसीपी ने बताया कि गैंग में छह मुख्य लोग शामिल हैं। इनमें कुछ तकनीकी विशेषज्ञ थे, जिनका काम फर्जी वेबसाइट और सिस्टम बनाना था, जबकि अन्य सदस्य यह तय करते थे कि किस शहर में जाना है, किस वर्ग को टारगेट करना है और किस तरीके से बड़े स्तर पर लोगों को जोड़ा जाए। अजय उर्फ टीपू शुरू से ही इस साजिश का हिस्सा था और नेटवर्क फैलाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

1 करोड़ रुपये की कमाई और 1500 लोगों को जोड़ा

गिरफ्तार अजय ने खुलासा किया कि उसने अपनी आईडी से हजारों लोगों को सिस्टम में जोड़ा और करीब 1 करोड़ रुपये कमाए। उसने बताया कि लोगों को Withdrawal की कोई सुविधा नहीं थी और मुनाफा सिर्फ स्क्रीन पर दिखाया जाता था। कई लोग वर्षों तक चुप रहे, यह सोचकर कि शायद पैसा वापस मिल जाएगा, लेकिन जब लंबे समय तक कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला तब शिकायत दर्ज कराई गई।

क़ोरोना काल के बाद सक्रिय हुआ गिरोह, अब पुलिस कर रही गहन जांच

जांच में पता चला कि गिरोह ने कोरोना के बाद तेजी से गतिविधियाँ बढ़ाईं। लोगों को शपथ दिलाई जाती थी कि वे तीन साल तक इस चेन से जुड़े रहेंगे। कई लोगों के साथ 2022–23 से लगातार ठगी होती रही, जिसके बाद 2024 में मुकदमे की शुरुआत हुई। पुलिस अब गिरोह के सभी वित्तीय लेनदेन, क्रिप्टो वॉलेट्स और बैंक खातों की जांच कर रही है।

फरार आरोपी नरेन्द्र, शुभम, गोपाल, विनय, विनोद और सचिन स्वामी की तलाश में

अजय की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस गैंग के अन्य छह मुख्य फरार सदस्यों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। साइबर क्राइम टीम का कहना है कि बहुत जल्द बाकी आरोपी भी गिरफ्त में होंगे।

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