इसे कहते हैं रणनीति!: !प्रेस क्लब चुनाव में सबको पछाड़ गए शरद शर्मा
आगरा. पत्रकार शरद शर्मा भले ही अब सक्रिय पत्रकारिता से दूर हों, लेकिन प्रेस क्लब की राजनीति में उनकी पकड़ आज भी अटूट साबित हुई।
ताज़ा ताज प्रेस क्लब चुनाव में उन्होंने ऐसा कमाल किया कि बड़े-बड़े दावेदार उनके सामने फीके पड़ गए।
सक्रिय प्रचार से दूरी और शांत स्वभाव के बावजूद शरद शर्मा को सबसे अधिक वोट मिले। यहां तक कि अध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव पद के प्रमुख दावेदार भी उनके मतों की संख्या के आसपास नहीं पहुंच पाए।
वहीं चुनाव के “रणनीतिकार” और खुद को “मठा धीश समझने वाले” भी अब सोचने को मजबूर हैं — आखिर ऐसी कौन सी रणनीति अपनाई शरद शर्मा ने कि सबसे ज़्यादा वोट उन्हीं की झोली में गए!
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद शर्मा ने इस बार बिना शोर किए, “साइलेंट स्ट्राइक” की रणनीति अपनाई। उन्होंने न प्रचार किया, न मंच सजाया — बस अपने पुराने संबंधों और साख पर भरोसा किया, और परिणाम ने सबको चौंका दिया।
क्लब के वरिष्ठ सदस्य कहते हैं —
“यह जीत बताती है कि राजनीति में शोर नहीं, सोच मायने रखती है। शरद शर्मा ने साबित कर दिया कि समझदारी और नेटवर्किंग ही असली पूंजी है।”
इस चुनाव के बाद अब एक बात साफ़ है —
ताज प्रेस क्लब की राजनीति में इस बार भी बाज़ी “रणनीति” ने मारी है, और उसके केंद्र में रहे — शरद शर्मा।
