एक अकेला सब पर भारी:: वरिष्ठ पत्रकार विवेक जैन की सफलता की कहानी
मन की बात
कहावत है—”एक अकेला सब पर भारी”। अक्सर यह सिर्फ कहावतों तक ही सीमित रह जाती है। लेकिन जब इसे किसी व्यक्ति ने अपने जीवन और कर्मों से सच कर दिखाया, तो वह प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। मेरे बड़े भाई और वरिष्ठ पत्रकार विवेक जैन जी ने यही किया है।
विवेक जैन का जीवन हमें यही सिखाता है कि जब संकल्प, ईमानदारी और सही दृष्टिकोण एक साथ मिल जाते हैं, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं रहती। हाल ही में जब उन्होंने महासचिव पद के लिए चुनाव लड़ा, तो यह साफ हो गया कि केवल व्यक्तिगत संबंधों और अपने कर्मों की सच्चाई से कैसे कोई व्यक्ति सबके दिलों पर छा सकता है।
अकेले पर सब पर भारी
विवेक जैन ने इस पद के लिए किसी बड़े संगठनात्मक सहयोग या गठबंधन का सहारा नहीं लिया। उन्होंने न केवल अपनी रणनीति बनाई बल्कि अपने व्यक्तिगत संबंधों, ईमानदार संवाद और निष्पक्ष दृष्टिकोण से सबका विश्वास हासिल किया।
“कर्म ही व्यक्ति की असली पहचान है, और सच्चाई उसका सबसे बड़ा हथियार।”
विवेक भैया ने अपने कर्म और व्यक्तिगत वायदों के प्रति निष्ठा दिखाकर यह साबित किया कि केवल शब्दों या दिखावे से नहीं, बल्कि कर्म और विश्वास से जीत हासिल की जा सकती है।
चुनाव में विजय और दिलों की जीत
विवेक जैन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने न केवल चुनाव में विजय प्राप्त की, बल्कि सबके दिलों को जीतने का काम भी किया। जब कोई व्यक्ति अपने संकल्प और शब्दों के प्रति ईमानदार होता है, तो उसके सामने कोई बाधा टिक नहीं पाती।
“सच्चा नेतृत्व वही है जो सम्मान और विश्वास दोनों अर्जित करे, न कि केवल पद प्राप्त करे।”
जैसा कि मैं जानता हूँ, विवेक जैन ने अपने सभी चुनावी वायदों को निभाने की ठानी है। हर वह वादा जो उन्होंने किया, वह न केवल शब्दों में, बल्कि कर्म में भी साकार होगा।
प्रेरणा और उदाहरण
विवेक जैन का यह सफर हम सबके लिए प्रेरणा है। यह दिखाता है कि अकेले भी आप सब पर भारी पड़ सकते हैं—बशर्ते आपका दृष्टिकोण स्पष्ट हो, आपका कर्म निष्पक्ष हो और आपके वादे सच्चाई के आधार पर हों।
“जो व्यक्ति अपने शब्दों और कर्मों में सच्चा होता है, वही अकेला भी सब पर भारी होता है।”
उनकी यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पत्रकारिता और समाज के प्रति उनके ईमानदार योगदान की भी पहचान है। उन्होंने साबित किया कि नेतृत्व सिर्फ पद और सत्ता नहीं है, बल्कि विश्वास, ईमानदारी और कर्मशीलता है।
आज जब हम वरिष्ठ पत्रकार विवेक जैन की सफलता की बात करते हैं, तो यह सिर्फ चुनाव की जीत नहीं है। यह एक जीवंत उदाहरण है कि कैसे अकेला व्यक्ति भी सब पर भारी पड़ सकता है, जब उसके पास सच्चाई, निष्ठा और दृष्टिकोण की ताकत हो।
“किसी भी क्षेत्र में असली विजय वही है, जो दूसरों के दिलों में अपनी जगह बना ले।”
विवेक जैन का यह सफर हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह साबित करता है कि यदि हम अपने वादों और कर्मों के प्रति निष्ठावान रहें, तो हम अकेले भी सब पर भारी पड़ सकते हैं।
