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आगरा में आवासीय कॉलोनियों में बिना अनुमति व्यावसायिक निर्माण:: सुप्रीम कोर्ट का मेरठ फैसला बनेगा ऐसे निर्माणो के लिए ‘गेम चेंजर’

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आगरा – सुप्रीम कोर्ट के 17 दिसंबर 2024 के landmark फैसले ने अवैध निर्माणों पर सख्त रुख अपनाया है, जिसका असर अब आगरा की प्रमुख आवासीय कॉलोनियों पर पड़ने वाला है। ट्रांस यमुना, ताजनगरी, कमला नगर, आवास विकास कॉलोनी और कालिंदी विहार में कई जगह आवासीय प्लॉटों पर बिना लैंड यूज चेंज और बिना मानचित्र स्वीकृति के रेस्टोरेंट, होटल और शोरूम चल रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला
राजेंद्र कुमार बरजात्या बनाम यूपी आवास एवं विकास परिषद** (2024 INSC 990) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा:
– आवासीय प्लॉट पर बिना अनुमति के व्यावसायिक निर्माण **पूरी तरह अवैध** है।
– लंबे समय तक निर्माण चलने, भारी निवेश करने या प्रशासनिक लापरवाही का हवाला देकर ऐसे निर्माणों को नियमित (regularize या शमन) नहीं किया जा सकता।

– कोर्ट का साफ संदेश: Illegality cannot be perpetuated– अवैधता को समय बीतने या किसी भी वजह से वैध नहीं बनाया जा सकता।
– नियमितीकरण योजनाएं केवल  अत्यंत दुर्लभ मामलों में लागू हो सकती हैं, वह भी सिर्फ आवासीय संपत्तियों के लिए और पूरी तरह सार्वजनिक हित, पर्यावरण तथा शहरी नियोजन का ध्यान रखते हुए। व्यावसायिक उपयोग में बदलाव पर शमन की गुंजाइश बहुत कम है।

कोर्ट ने विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए कि ऐसे अवैध निर्माणों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अनिवार्य है और दोषी अधिकारियों पर विभागीय तथा आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।

आगरा की स्थिति
ट्रांस यमुना, ताजनगरी, कमला नगर, आवास विकास कॉलोनी और कालिंदी विहार जैसी आवासीय योजनाओं में कई मकानों को परिवर्तित कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इनमें ज्यादातर मामलों में लैंड यूज चेंज नहीं कराया गया है और बिल्डिंग प्लान की स्वीकृति भी नहीं ली गई।

Uttar प्रदेश आवास विकास परिषद आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) ने पहले ट्रांस यमुना और आसपास के क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है, लेकिन बड़े पैमाने पर आवासीय से व्यावसायिक परिवर्तन पर अभी सख्त ध्वस्तीकरण नहीं हुआ है।

फैसले के बाद संभावित प्रभाव
– बिना completion/occupation certificate के दिए गए बिजली, पानी या ट्रेड लाइसेंस पर भी सवाल उठ सकते हैं।
– ADA को इन कॉलोनियों में सर्वे तेज करने और नोटिस जारी करने पड़ सकते हैं।

व्यापारियों की चिंता
इन क्षेत्रों में रेस्टोरेंट-होटल चलाने वाले कई संचालकों का कहना है कि उन्होंने सालों से टैक्स जमा किया और निवेश किया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का रुख बिल्कुल स्पष्ट है – कानून की अनदेखी को निवेश या समय के आधार पर वैधता नहीं दी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आगरा में नियोजित शहरी विकास और ताज संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। आगरा विकास प्राधिकरण और संबंधित विभागों को अब सख्ती से कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा अदालत में जवाबदेही तय हो सकती है।

 

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