वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव: घट गई आधी आबादी की वोटिंग ताकत
आगरा–फतेहपुर सीकरी क्षेत्र की ताज़ा मतदाता सूची ने लोकतंत्र की सेहत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 की वोटर लिस्ट में महिला मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़े साफ़ संकेत देते हैं कि आधी आबादी की चुनावी भागीदारी और वोटिंग ताकत कमजोर हुई है, जो आने वाले चुनावों के लिहाज़ से चिंताजनक है।
कुल आंकड़ों की स्थिति
संशोधित आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में इस क्षेत्र में
- पुरुष मतदाता: 19,20,035
- महिला मतदाता: 16,38,525
इस आधार पर
1000 पुरुष मतदाताओं पर 853 महिला मतदाता दर्ज थीं।
वहीं वर्ष 2025 की मतदाता सूची में
- पुरुष मतदाता: 15,25,574
- महिला मतदाता: 12,37,897
यानी 1000 पुरुषों पर केवल 811 महिला मतदाता रह गईं।
इस तरह सिर्फ एक साल के भीतर महिला-पुरुष जेंडर रेशियो में 42 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।
विधानसभा क्षेत्र-वार गिरावट
विधानसभा क्षेत्र-वार आंकड़े बताते हैं कि लगभग हर क्षेत्र में महिला वोटरों की संख्या घटी है।
सबसे ज़्यादा गिरावट शहरी इलाकों में दर्ज की गई—
- आगरा कैंट: 84,852 महिला वोट कम
- आगरा नॉर्थ: 70,558 महिला वोट कम
- आगरा साउथ: 57,576 महिला वोट कम
इसके अलावा
- आगरा ग्रामीण में 50,534
- एत्मादपुर में 42,601
- बाह में 28,267
- फतेहपुर सीकरी में 23,443
- खेरागढ़ में 22,627
- फतेहाबाद में 20,170
महिला मतदाताओं की कमी दर्ज की गई।
क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े
लोकतंत्र में महिलाओं को आधी आबादी माना जाता है, लेकिन मतदाता सूची में उनकी घटती हिस्सेदारी यह दिखाती है कि चुनावी ताकत का संतुलन बिगड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट सामान्य जनसंख्या परिवर्तन नहीं मानी जा सकती।
चुनावी मामलों से जुड़े जानकारों का कहना है कि इसके पीछे
- मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान नाम कटना
- दस्तावेज़ संबंधी समस्याएं
- पता परिवर्तन या प्रवासन
- और जागरूकता की कमी
जैसे कारण हो सकते हैं। हालांकि, महिला मतदाताओं की इतनी बड़ी संख्या में कमी को लेकर अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है।
लोकतंत्र के लिए चेतावनी
आंकड़े यह भी बताते हैं कि यदि यही रुझान आगे भी जारी रहा, तो
- चुनावी भागीदारी प्रभावित होगी
- महिलाओं की राजनीतिक आवाज़ कमजोर पड़ेगी
- और प्रतिनिधित्व असंतुलित हो सकता है
2025 की वोटर लिस्ट में महिला मतदाताओं की संख्या और जेंडर रेशियो, दोनों में स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई है।
1000 पुरुषों पर महिला वोटरों का अनुपात 853 से घटकर 811 रह जाना लोकतंत्र के लिए गंभीर संकेत है।
आधी आबादी की वोटिंग ताकत कमजोर होना चुनावी व्यवस्था के लिए चेतावनी माना जा रहा है।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि चुनावी तंत्र और प्रशासन इस गिरावट के कारणों की समीक्षा कर महिला मतदाताओं की लोकतांत्रिक भागीदारी को कैसे मज़बूत करता है।
