महिला आयोग अध्यक्ष बबीता चौहान का बुर्के क़ो लेकर बड़ा बयान: सरकारी लाभ लेते समय चेहरा उजागर, जनसुनवाई में बुर्का क्यों
आगरा। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने जनसुनवाई के दौरान बुर्के और नकाब को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मामला किसी धर्म या पहनावे का नहीं, बल्कि पहचान छिपाने और पारदर्शिता से बचने का है। आयोग के सामने सुनवाई के बाद भी नकाब न हटाने को उन्होंने गंभीर सवालों के घेरे में बताया।
बबीता चौहान ने कहा कि महिला आयोग में शिकायतों की सुनवाई धर्म, जाति या वर्ग देखकर नहीं की जाती। आयोग केवल महिला को महिला मानकर न्याय दिलाने का काम करता है। इसके बावजूद यदि कोई महिला अपनी पहचान छिपाकर बैठती है, तो इससे नीयत और मंशा पर संदेह पैदा होता है।
जनसुनवाई का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि बागपत में कई महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के बावजूद इसे स्वीकार करने से इनकार करती रहीं। जब उनसे सुविधाओं की जांच कराने की बात कही गई, तब सभी ने हाथ उठाकर माना कि उन्हें योजनाओं का लाभ मिला है। आयोग अध्यक्ष ने इसे सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग और सच छिपाने की मानसिकता बताया।
महिला आयोग अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जब आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट और आयुष्मान कार्ड बनवाते समय चेहरा दिखाया जाता है, तो आयोग के सामने पर्दा क्यों किया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे व्यवस्था पर अविश्वास और भ्रम की स्थिति बनती है।
बबीता चौहान ने दो टूक कहा कि यदि कोई महिला हर हाल में नकाब में रहना चाहती है और सार्वजनिक सुनवाई में भी पहचान उजागर नहीं करना चाहती, तो यह न्याय प्रक्रिया में बाधा है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं घरों की तुलना में बाहर अधिक सुरक्षित हैं और खुलकर सामने आकर अपनी बात रखने से ही समाधान संभव है।
महिला आयोग अध्यक्ष के इस सख्त बयान के बाद प्रदेश की राजनीति और सामाजिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
