नियमों एवम कानून के बाहर जाकर उत्तर प्रदेश सरकार ने जारी की "राजाज्ञा": CEC की आपत्ति के बाद बदला कीठम पक्षी विहार विस्तार का प्रस्ताव
विशेष संवाददाता, आगरा। सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम) के सीमा विस्तार की प्रक्रिया में एक अहम खामी सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को अपना प्रस्ताव बदलना पड़ा है। दरअसल, राज्य सरकार ने अधिसूचना में नए शामिल किए जाने वाले क्षेत्र के चारों ओर इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) शून्य किलोमीटर रहने की शर्त जोड़ दी थी, जबकि ESZ अधिसूचित करने या उसकी सीमा तय करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) ने इस पर आपत्ति जताई तो शासन ने शर्त हटाकर संशोधित प्रस्ताव तैयार किया। अब अंतिम अधिसूचना जारी करने के लिए वन विभाग ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है।
मामला डॉ. शरद गुप्ता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के तहत एनजीटी में विचाराधीन है। सूर सरोवर पक्षी विहार की सीमा को सुव्यवस्थित करने के लिए तीन अलग-अलग भूमि क्षेत्रों को इसमें शामिल किया जाना है। इनमें 403.09 हेक्टेयर तथा 380.558 हेक्टेयर (सूरदास आरक्षित वन ब्लॉक) की अंतिम अधिसूचना पहले ही वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26ए के तहत जारी की जा चुकी है। अब केवल 14.5025 हेक्टेयर राजकीय भूमि को पक्षी विहार में शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 27 दिसंबर 2024 को जारी अधिसूचना में यह उल्लेख किया था कि पक्षी विहार में शामिल किए जा रहे नए क्षेत्र के चारों ओर इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) शून्य किलोमीटर रहेगा। इसी बिंदु पर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) ने आपत्ति दर्ज की।
समिति ने 29 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत इको-सेंसिटिव जोन अधिसूचित करने अथवा उसकी सीमा तय करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। इसलिए राज्य सरकार अपने स्तर पर इसे शून्य किलोमीटर घोषित नहीं कर सकती। समिति ने अधिसूचना में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए।
CEC की आपत्ति के बाद शासन और वन विभाग ने पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू की। एक अप्रैल 2026 को प्रमुख सचिव (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग) की अध्यक्षता में लखनऊ में उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में अधिसूचना से ‘शून्य किलोमीटर ESZ’ वाली शर्त हटाने का निर्णय लिया गया।
इसके बाद आगरा में चार सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति ने अधिसूचना के हिंदी और अंग्रेजी दोनों प्रारूपों में संशोधन किया। जिलाधिकारी आगरा की संस्तुति के बाद संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया। इसके बाद तीन जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य वन्यजीव बोर्ड (SBWL) की बैठक में भी संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया गया।
13 जुलाई 2026 को होने वाली सुनवाई से पहले मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), पश्चिमी क्षेत्र, कानपुर संजीव कुमार की ओर से एनजीटी में नया प्रगति हलफनामा दाखिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि केंद्रीय समिति के निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक संशोधन पूरे कर लिए गए हैं। अब केवल 14.5025 हेक्टेयर राजकीय भूमि को सूर सरोवर पक्षी विहार में शामिल करने की अंतिम अधिसूचना राज्य सरकार से जारी होनी बाकी है।
वन विभाग ने एनजीटी से अनुरोध किया है कि अंतिम अधिसूचना जारी करने और सभी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाए।
डॉ. शरद गुप्ता बोले- कानून से ऊपर कोई नहीं, गलती पकड़ी गई तो सरकार को प्रस्ताव बदलना पड़ा
याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने कहा कि यह मामला साफ दिखाता है कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में कानून की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, “इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, इसके बावजूद अधिसूचना में शून्य किलोमीटर ESZ की शर्त जोड़ दी गई। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) ने इस पर आपत्ति जताई तो सरकार को अपना प्रस्ताव बदलना पड़ा।”
उन्होंने कहा कि यदि यह त्रुटि समय रहते सामने नहीं आती तो आगे चलकर पूरी प्रक्रिया कानूनी विवाद में फंस सकती थी। उनका कहना है कि सूर सरोवर पक्षी विहार का विस्तार जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी है कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में और पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब संशोधित प्रस्ताव पर बिना किसी नई कानूनी खामी के अंतिम अधिसूचना जल्द जारी होगी।
