ताजमहल क्षेत्र में ‘कोड लैंग्वेज’ से पर्यटकों को घेरने का खेल,: गाइड-दुकानदार की सेटिंग पर सवाल
आगरा। ताजमहल और आसपास के पर्यटन स्थलों पर आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के बीच कुछ गाइड और दुकानदारों की मिलीभगत का नया तरीका सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि अंग्रेजी, जापानी और अन्य विदेशी भाषाएं बोलने वाले कुछ गाइड आपस में एक अलग तरह की ‘कोड लैंग्वेज’ का इस्तेमाल करते हैं, जिसे आम लोग समझ नहीं पाते।
पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इस भाषा का इस्तेमाल पर्यटकों की आर्थिक स्थिति बताने, मोलभाव का संकेत देने और दुकानों-शोरूम तक पर्यटकों को पहुंचाने के लिए किया जाता है। कई बार गाइड पहले ही दुकानदार को इशारा कर देते हैं कि आने वाला पर्यटक कितना खर्च कर सकता है। इसके बाद उसी हिसाब से सामान दिखाया और दाम तय किए जाते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस ‘कोड लैंग्वेज’ में कुछ खास शब्दों का प्रयोग किया जाता है, जिनसे दुकानदार और गाइड एक-दूसरे को संकेत देते हैं। पर्यटक इन शब्दों का मतलब नहीं समझ पाते, इसलिए उन्हें सामान्य बातचीत ही लगती है।
पर्यटन कारोबार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कई जगहों पर गाइड और दुकानदारों के बीच पहले से कमीशन तय रहता है। यदि पर्यटक खरीदारी करता है तो उसका एक हिस्सा गाइड को मिलता है। इसी वजह से कई बार पर्यटकों को खास दुकानों और शोरूम तक ही ले जाया जाता है।
ताजमहल क्षेत्र में रोजाना हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। इनमें बड़ी संख्या विदेशी सैलानियों की भी होती है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों पर सख्ती जरूरी है, ताकि ताजनगरी की छवि खराब न हो और पर्यटकों को पारदर्शी व भरोसेमंद व्यवस्था मिल सके।
पर्यटन से जुड़े जानकारों का कहना है कि अधिकांश गाइड ईमानदारी से काम करते हैं, लेकिन कुछ लोगों की वजह से पूरे पेशे की छवि प्रभावित होती है। इसलिए पर्यटन क्षेत्र में निगरानी और स्पष्ट नियमों की जरूरत महसूस की जा रही है।
