जेल से निकला और फिर शुरू ‘वसूली राज’: मोनू यादव पर रंगदारी के साथ फायरिंग का आरोप
- दस लाख की मांग, दहशत में 30 हजार वसूले;
- पुराने केस के आरोपी पर नए मुकदमे से पुलिस पर बढ़ा दबाव
आगरा।ट्रांसयमुना इलाके में खौफ का नाम बन चुके हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव ने जेल से बाहर आते ही फिर से दबंगई दिखानी शुरू कर दी। एक ढाबा संचालक से दस लाख रुपये की रंगदारी मांगने, मारपीट करने और गोली चलाने के आरोप में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। वारदात के बाद से आरोपी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है।
पीड़ित राजू (निवासी नगला रामबल) ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि कालिंदी विहार स्थित उसके ढाबे पर मोनू यादव अपने साथियों के साथ अक्सर आता था। खाना खाकर पैसे न देना, दबाव बनाना और धमकाना उसका रोज का तरीका बन चुका था। हालात इतने बिगड़ गए कि उसने ढाबा ही किराये पर उठा दिया।
राजू के मुताबिक, 22 जनवरी को पंचमुखी मंदिर के पास मोनू यादव अपने साथियों रजत, सेठी, सोनू और मुरली के साथ उसे घेर लिया। आरोप है कि पहले बेरहमी से मारपीट की गई और फिर उस पर फायरिंग कर दी गई। घायल हालत में वह किसी तरह जान बचाकर भागा।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब 16 अप्रैल को जेल से छूटने के अगले ही दिन मोनू यादव ने फिर पीड़ित को पकड़ लिया। इस बार सीधे 10 लाख रुपये की मांग रखी गई। जान के डर से पीड़ित ने उसी वक्त जेब में मौजूद 30 हजार रुपये दे दिए।
पीड़ित का आरोप है कि मोनू यादव और उसके गुर्गों का इलाके में ऐसा खौफ है कि कोई खुलकर विरोध करने की हिम्मत नहीं करता। “जो भी आवाज उठाता है, उसके साथ कुछ भी हो सकता है,” उसने तहरीर में लिखा है।
पुलिस ने इस मामले में रंगदारी और जानलेवा हमले की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी और उसके साथियों की तलाश की जा रही है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
पुराना कनेक्शन, नया दबाव:
दिसंबर 2025 में हुए राज चौहान हत्याकांड में भी मोनू यादव का नाम सामने आया था। उस मामले में कार्रवाई को लेकर पहले ही सवाल उठ रहे थे। अब जेल से निकलते ही नई वारदात के आरोप ने पुलिस की कार्यशैली पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल यही—जेल से निकलते ही कैसे फिर सक्रिय हो गया हिस्ट्रीशीटर?
