आगरा। गुजरात के नाम पर तैयार बिल और मंजिल आगरा… लेकिन जब टोल पर SGST की टीम ने वाहन रोका तो कागजों और माल के बीच का फर्क सामने आ गया। वाहन से करीब 250 किलो चांदी की खेप मिलने के बाद अब इस पूरे मामले को लेकर चांदी के कारोबार से जुड़े बाजार में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
बताया जा रहा है कि दस्तावेजों में चांदी की मात्रा कम दर्शाई गई थी, जबकि वाहन की जांच में इससे कहीं ज्यादा माल मिला। यही अंतर अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
सूत्रों के मुताबिक, पकड़ी गई चांदी की खेप को आगरा के एक नामी चांदी कारोबारी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, विभागीय जांच पूरी होने तक खेप के वास्तविक मालिक को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बिल गुजरात के नाम का था तो इतनी बड़ी चांदी की खेप आगरा क्यों आ रही थी? क्या दस्तावेजों में कम माल दिखाया गया था और वास्तविक माल ज्यादा था? अगर ऐसा है तो इसके पीछे वजह क्या थी?
चांदी की इस खेप के पकड़े जाने के बाद आगरा के चांदी बाजार में भी चर्चाएं गर्म हैं। कारोबारी गलियारों में माल की वास्तविक मात्रा, बिल में दर्ज मात्रा और संभावित टैक्स देनदारी को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं।
फिलहाल SGST विभाग चांदी की वास्तविक मात्रा, बिल और दूसरे दस्तावेजों की जांच में जुटा है। जांच के बाद ही साफ होगा कि खेप का असली मालिक कौन है, चांदी किसे पहुंचाई जानी थी और दस्तावेजों में कम माल दिखाने के पीछे आखिर क्या वजह थी।
यानी सवाल सिर्फ 250 किलो चांदी का नहीं… सवाल उस बिल का भी है, जो गुजरात का था और जिसकी चांदी आगरा पहुंच रही थी।
