आगरा में नकली दवाओं के बड़े खेल का पर्दाफाश;: सैंपल माफिया सुमित गुप्ता के ठिकाने पर छापा, भारी मात्रा में फिजिशियन सैंपल बरामद
आगरा:शहर के दिल कहे जाने वाले फव्वारा इलाके में ड्रग विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली और प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ किया है। शनिवार को हुई इस छापेमारी से पूरे मार्केट में हड़कंप मच गया। बौहरे राम गोपाल मार्केट की दुकान नंबर 17 (द्वितीय तल) में बिना किसी लाइसेंस के भारी मात्रा में ‘नॉट फॉर सेल’ (बिक्री के लिए नहीं) वाले फिजिशियन सैंपल और संदिग्ध दवाएं छिपाकर रखी गई थीं, जिन्हें अवैध तरीके से बाजार में बेचने की तैयारी थी।
दवाओं का यह जखीरा देखकर खुद अधिकारी भी हैरान रह गए।
मुखबिर की सटीक सूचना पर घेराबंदी
यह पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दी गई। दरअसल, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन मुख्यालय को एक पुख्ता जानकारी मिली थी कि मार्केट के दूसरे तल पर स्थित एक दुकान में अवैध रूप से जीवनरक्षक दवाओं का खेल चल रहा है। सूचना मिलते ही विभाग ने सक्रियता दिखाई और आगरा के औषधि निरीक्षक नवनीत कुमार के साथ बुलंदशहर, उन्नाव, गौतमबुद्ध नगर, रामपुर और संभल के औषधि निरीक्षकों की एक संयुक्त विशेष टीम तैयार की।
जैसे ही यह टीम शनिवार दोपहर करीब 11:50 बजे मुबारक महल मार्केट के रास्ते बौहरे राम गोपाल मार्केट पहुंची, वहां हड़कंप मच गया। अधिकारियों की गाड़ियों को देखकर कई मेडिकल स्टोर संचालक आनन-फानन में अपनी दुकानों के शटर गिराकर रफूचक्कर हो गए। टीम सीधे उस संदिग्ध दुकान पर पहुंची, जिसका शटर आधा गिरा हुआ था और वहां ताला लटकाकर संचालक फरार हो चुका था।
मकान मालिक को बुलाकर खुलवाया ताला
दुकान बंद पाकर टीम ने तुरंत भवन स्वामी जगदीश राठी को मौके पर बुलाया। पूछताछ में सामने आया कि यह दुकान कमला नगर निवासी सुमित गुप्ता (पुत्र स्वर्गीय अरुण गुप्ता) और उनकी पत्नी संजोली गुप्ता को दवा भंडारण के लिए किराए पर दी गई थी। जब आरोपी सुमित गुप्ता को फोन कर मौके पर आने को कहा गया, तो वह घंटों इंतजार के बाद भी सामने नहीं आया। इसके बाद रविवार को भवन स्वामी की लिखित सहमति और मौजूदगी में दुकान का ताला खोला गया।
अंदर का नजारा चौंकाने वाला था
दुकान के भीतर कदम रखते ही अधिकारियों के होश उड़ गए। वहां चारों तरफ नामी मल्टीनेशनल कंपनियों की ब्रांडेड दवाओं के फिजिशियन सैंपल्स का अंबार लगा था। इन दवाओं पर काले मार्कर से उनकी कीमत (MRP) को छुपाया गया था और उन पर अवैध तरीके से स्टीकर चिपकाए गए थे। कई दवाएं तो ऐसी थीं जिनकी म्याद (Expiry Date) भी खत्म हो चुकी थी।
13 बोरियों में सील हुई दवाएं, सैंपल्स जांच के लिए भेजे
दुकान के भीतर दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड चेन या सही तापमान का कोई इंतजाम नहीं था, जिससे दवाओं की गुणवत्ता पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। टीम ने मौके से 12 संदिग्ध दवाओं के नमूने सील किए हैं, जिन्हें लैब में जांच के लिए भेजा जा रहा है। इसके अलावा, बची हुई सभी अवैध दवाओं को 13 बड़ी सफेद प्लास्टिक की बोरियों में भरकर उसी दुकान के भीतर सुरक्षित रख दिया गया है और दुकान को पूरी तरह सील कर दिया गया है।
इस मामले में मुख्य आरोपी सुमित गुप्ता के खिलाफ आगरा के कोतवाली थाने में गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस और ड्रग विभाग की टीमें अब फरार आरोपी की तलाश में जुट गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि लैब से रिपोर्ट आते ही औषधि निरीक्षक द्वारा अग्रिम कार्यवाही करते हुए सक्षम न्यायालय में परिवाद दाखिल किया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद से शहर के दवा माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े ठिकानों पर छापेमारी की उम्मीद है।
