एक साल पहले शुरू हुई कार्रवाई फाइलों में उलझी, निर्माण रोकने के आदेश के बावजूद नहीं थमा काम; अब सीलिंग के नाम पर टालमटोली
आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की प्रवर्तन व्यवस्था का एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जिसमें अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी संभालने वाला विभाग नोटिस जारी करने के बाद मानो गहरी नींद में सो गया। नतीजा यह हुआ कि जिस निर्माण को समय रहते रुकवाया जा सकता था, वह देखते ही देखते इमारत की शक्ल लेता चला गया। अब जब कार्रवाई की बात आई तो प्राधिकरण की सक्रियता कागजी आदेशों और चेतावनियों तक सिमटती नजर आ रही है।

मामला लोहमंडी वार्ड के ताज की मंडी, पुनिया पाड़ा का है। यहां अनूप अग्रवाल से संबंधित निर्माण को लेकर एडीए के प्रवर्तन अनुभाग ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की थी। प्राधिकरण के दस्तावेज के मुताबिक, 26 दिसंबर 2025 को सीलिंग से पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद 12 फरवरी 2026 को जारी दूसरे पत्र में एडीए ने स्पष्ट किया कि निर्माण की स्वीकृति के संबंध में संबंधित व्यक्ति की ओर से कोई जवाब अथवा स्वीकृति प्रस्तुत नहीं की गई है।
हैरानी की बात यह है कि इसी पत्र में एडीए ने निर्माण कार्य तत्काल बंद करने और परिसर खाली करने के निर्देश देते हुए तीन दिन के भीतर सूचना देने को कहा। साथ ही चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं होने पर प्राधिकरण परिसर को सील कर देगा। सवाल यह है कि जब प्राधिकरण को निर्माण की जानकारी थी, नोटिस जारी हो चुका था और जवाब भी प्रस्तुत नहीं किया गया था, तो फिर प्रभावी कार्रवाई करने में देरी क्यों हुई? क्या एडीए की जिम्मेदारी सिर्फ नोटिस जारी करना और फिर अगली कार्रवाई के लिए इंतजार करना है?
नोटिस के बाद भी निर्माण कैसे होता रहा?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल एडीए के प्रवर्तन अधिकारियों की निगरानी और जवाबदेही को लेकर है। यदि निर्माण नियमों के विपरीत था तो शुरुआती स्तर पर ही उसे क्यों नहीं रोका गया? यदि तीन दिन में परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया था तो उसकी अनुपालना किसने सुनिश्चित की? मौके पर दोबारा निरीक्षण हुआ या नहीं? और यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो सीलिंग की कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई? इन सवालों का जवाब प्राधिकरण को देना चाहिए।
मामले में क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि पिछले सप्ताह ही नोटिस जारी किया गया है और अब इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी के मुताबिक, प्रॉपर्टी के पीछे की ओर बनाए जा रहे इसी संपत्ति से संबंधित अन्य मकानों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं एडीए अधिकारी का कहना है कि फ्लैट्स को लेकर पहले ही सीलिंग के नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब केवल सीलिंग की कार्रवाई की जानी है। वही वीडियो द्वारा नोटिस में दिए गए टाइम भी बुधवार को पूरा हो रहा है।
अवैध निर्माण करने वालों को किसका संरक्षण?
एडीए की ऐसी कार्यप्रणाली से अवैध निर्माण करने वालों के हौसले बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। शहर में आम नागरिक नक्शा पास कराने और नियमों का पालन करने के लिए प्राधिकरण के चक्कर काटते हैं, वहीं दूसरी ओर नोटिस जारी होने के बावजूद निर्माण जारी रहने की शिकायतें विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े करती हैं। अगर नोटिस के बाद भी निर्माण पूरा हो जाता है तो फिर नोटिस जारी करने का औचित्य ही क्या रह जाता है?
अब देखना यह है कि एडीए इस मामले में सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है या मौके पर पहुंचकर नियमानुसार ठोस कार्रवाई भी करता है। साथ ही यह भी तय होना चाहिए कि नोटिस जारी होने के बाद निर्माण नहीं रुकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी।
