1960 से 2030 तक मंच पर उतरी नारी शक्ति की ऐसी कहानी, जहां इंदिरा से सिंधु और कल्पना चावला से स्मृति मंधाना तक हर किरदार ने कहा—‘हौसले की कोई उम्र नहीं होती’

आगरा। कभी घूंघट के पीछे सिमटी दिखाई देने वाली नारी… फिर घर की चौखट लांघकर राजनीति में पहुंची, खेल के मैदान में तिरंगा लहराया, अंतरिक्ष में उड़ान भरी और कारोबार से लेकर सिनेमा तक अपनी पहचान बनाई। वक्त बदलता गया, दशक बदलते गए, पहनावे और अंदाज बदलते गए, लेकिन नारी के हौसले की कहानी लगातार आगे बढ़ती रही। इसी कहानी को जब मंच पर उतारा गया तो 1960 से 2030 तक के सात दशकों का सफर कुछ ही घंटों में आंखों के सामने जीवंत हो उठा।

शिल्पग्राम रोड स्थित होटल ताज कन्वेंशन में स्पाइसी शुगर संस्था की ओर से आयोजित ‘नारी सशक्तिकरण—कल, आज और कल’ समारोह में मंच पर सिर्फ रंग-बिरंगे परिधान और गीत-संगीत नहीं थे, बल्कि हर प्रस्तुति के पीछे एक दौर की कहानी और हर किरदार के पीछे महिलाओं के संघर्ष, साहस और उपलब्धियों की झलक थी।

घूंघट से ग्लोबल पहचान तक… सात दशकों में बदली तस्वीर

कार्यक्रम की शुरुआत बदलते दशकों की उस यात्रा से हुई, जिसमें महिलाओं की सामाजिक भूमिका के बदलते स्वरूप को प्रस्तुत किया गया। 1960 के दशक की महिलाओं से लेकर 2030 की आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी महिला तक का सफर अभिनय, संगीत, संवाद और फैशन के जरिए दिखाया गया।

इंदिरा गांधी, मदर टेरेसा, आशा भोसले और मैडोना जैसे अलग-अलग क्षेत्रों और देशों में पहचान बनाने वाले व्यक्तित्वों को मंच पर उतारकर बताया गया कि नारी की क्षमता को किसी एक भूमिका या सीमा में बांधा नहीं जा सकता।

राजनीति से संसद तक… जब महिलाओं ने बदली सत्ता की तस्वीर

राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को भी प्रस्तुतियों में खास जगह मिली। इंदिरा गांधी, सुषमा स्वराज और किरण बेदी जैसे व्यक्तित्वों के जरिए यह संदेश दिया गया कि महिलाओं ने केवल राजनीति में भागीदारी नहीं की, बल्कि निर्णय लेने वाली शीर्ष भूमिकाओं तक पहुंचकर अपनी क्षमता साबित की।

बल्ला उठा तो बेटियों ने इतिहास लिख दिया

कार्यक्रम में महिला क्रिकेट की उपलब्धियों ने खास आकर्षण पैदा किया। मिताली राज, झूलन गोस्वामी, हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना के किरदारों ने मंच पर खेल की दुनिया में महिलाओं के बढ़ते दबदबे की कहानी सुनाई।

कभी क्रिकेट को पुरुषों का खेल मानने वाली सोच के सामने आज भारतीय बेटियां अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। प्रस्तुतियों ने इसी बदलाव को प्रभावी अंदाज में सामने रखा।

धरती से आसमान तक… सपनों को मिली पंखों की ताकत

कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स के किरदारों ने कार्यक्रम को एक अलग ऊंचाई दी। अंतरिक्ष की दुनिया में महिलाओं की मौजूदगी को रेखांकित करते हुए बताया गया कि सपने देखने और उन्हें हासिल करने की कोई सीमा नहीं होती।

सुर, सिनेमा और सितारों में भी महिला शक्ति का जलवा

माधुरी दीक्षित, आशा भोसले और श्रेया घोषाल जैसी हस्तियों को गीत, संगीत और अभिनय के जरिए मंच पर प्रस्तुत किया गया। हॉलीवुड की मैडोना को भी कार्यक्रम की थीम का हिस्सा बनाया गया। इन प्रस्तुतियों ने मनोरंजन की दुनिया में महिलाओं के प्रभाव और उनकी लंबी यात्रा को सामने रखा।

दूध की धार से बदली तस्वीर… श्वेत क्रांति में महिलाओं को सलाम

श्वेत क्रांति में महिलाओं के योगदान को भी कार्यक्रम में विशेष सम्मान दिया गया। इसके जरिए यह संदेश दिया गया कि देश के विकास की कहानी केवल बड़े शहरों, उद्योगों या संस्थानों की कहानी नहीं है, बल्कि गांवों और घरों में मेहनत करने वाली महिलाओं का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

असली सवाल—सशक्त महिला को सुरक्षित कब महसूस होगा?

कार्यक्रम का समापन सबसे गंभीर और जरूरी सवाल के साथ हुआ। संस्थापक पूनम सचदेवा के साथ चांदनी ग्रोवर, पावनी सचदेवा, सिमरन और शिखा जैन ने विशेष प्रस्तुति देकर महिला सशक्तिकरण के साथ महिला सुरक्षा का संदेश दिया।

पूनम सचदेवा ने कहा, “उसे जीने दो, उसे आगे बढ़ने दो, क्योंकि जब एक महिला आगे बढ़ती है तो केवल एक परिवार नहीं, पूरा समाज आगे बढ़ता है।”

उन्होंने कहा कि महिला को सशक्त बनाने की बात तभी पूरी होगी, जब वह खुद को सुरक्षित भी महसूस करे। फैशन बदल सकता है, पहनावा बदल सकता है, तकनीक बदल सकती है, लेकिन नारी की गरिमा कभी आउटडेटेड नहीं होती। आज महिला अपने सपनों को उड़ान देना चाहती है, अपनी पहचान बनाना चाहती है, लेकिन सुरक्षा को लेकर अब भी कई सवाल उसके सामने खड़े हैं।

मंच से मिला संदेश—नारी को अवसर नहीं, बराबरी चाहिए

मुख्य अतिथि डॉ. रंजना बंसल और डॉ. ब्लॉसम ने कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए महिलाओं का उत्साहवर्धन किया और प्रस्तुतियों की सराहना की। प्रतिभागी सदस्यों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

डॉ. रंजना बंसल ने कहा कि आज की महिला हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही है। उसे अवसर और विश्वास मिले तो वह परिवार, समाज और देश—तीनों को नई दिशा देने की ताकत रखती है।

कार्यक्रम में रिंपी जैन, पूजा ओबेरॉय, स्नेहा जैन, रानी रलहन, माला खेरा, रेनू लांबा, रेशमा मगन, प्रीति कोहली सहित अन्य सदस्य मौजूद रहीं।

 

 

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