आगरा। सरकारी जमीन पर किसका अधिकार है और उस पर निर्माण की अनुमति कौन दे रहा है? आगरा में नजूल की जमीनों से जुड़े मामलों ने अब इस सवाल को और गंभीर बना दिया है। गुड़ की मंडी प्रकरण में पहले से मुकदमा दर्ज है और अब धाकरान की नजूल भूमि पर व्यावसायिक नक्शा स्वीकृत कराने के मामले में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है। मामला सिर्फ कथित फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि नक्शा स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया और इसमें शामिल लोगों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
धाकरान प्रकरण में एडीए के सहायक अभियंता रमन कुमार की तहरीर पर अजय महाजन, प्रमोद कुमार गुप्ता, संजीव कुमारी गुप्ता और इंजीनियर बनवारी सिंह को नामजद किया गया है। मुकदमा लोहामंडी थाने में दर्ज हुआ है। आरोप है कि नजूल विभाग की एनओसी नहीं मिलने के बावजूद कथित फर्जी आख्या के आधार पर व्यावसायिक मानचित्र स्वीकृत करा लिया गया।
नजूल विभाग ने NOC से किया इनकार, फिर कैसे पास हुआ नक्शा?
विवादित जमीन सर्वे शीट नंबर 107, मौजा चक अब्बल में दर्ज बताई गई है। प्रकरण में नजूल विभाग ने जमीन के संबंध में एनओसी देने से इनकार किया था। इसके बावजूद नक्शा स्वीकृत होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि नजूल विभाग की आपत्ति को दरकिनार कर दस्तावेजों के आधार पर मानचित्र स्वीकृत कराया गया।
4 जनवरी के पत्र ने खड़े किए गंभीर सवाल
मामले में 4 जनवरी 2025 का एक कथित आपत्ति पत्र अहम कड़ी बनकर सामने आया है। आरोप है कि इस पत्र को OBPAS पोर्टल पर अपलोड किया गया था। लेकिन नजूल विभाग ने इस पत्र को अपने कार्यालय से जारी होने से ही इनकार कर दिया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पत्र तैयार किसने किया, पोर्टल पर किसने अपलोड किया और उसकी सत्यता की जांच किए बिना नक्शा कैसे स्वीकृत हो गया?
गुड़ की मंडी के बाद धाकरान, क्या एक जैसी है कार्यप्रणाली?
गुड़ की मंडी प्रकरण में पहले से मुकदमा दर्ज होने के बाद धाकरान का मामला सामने आने से नजूल भूमि और निर्माण स्वीकृतियों को लेकर एडीए की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है। दोनों मामलों में सरकारी जमीन, निर्माण और संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण है। अब जांच में यह भी देखना अहम होगा कि कहीं नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया में एक जैसी अनियमितताएं तो नहीं हुईं।
अधिकारियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल, दलालों की जांच के संकेत
सूत्रों के अनुसार, धाकरान प्रकरण की जांच का दायरा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच सकता है। नक्शा स्वीकृति के दौरान किस स्तर पर दस्तावेजों की जांच हुई और किन अधिकारियों ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, इसकी पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि जमीन और नक्शा संबंधी मामलों में सक्रिय कुछ तथाकथित दलालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो मामले में नए नाम सामने आ सकते हैं।
एडीए ने नक्शा निरस्त किया, निर्माण पर भी नोटिस
एडीए ने विवादित व्यावसायिक मानचित्र निरस्त कर दिया है। साथ ही निर्माण के संबंध में नोटिस भी जारी किया गया है। सचिव के निर्देश पर सहायक अभियंता की तहरीर के आधार पर लोहामंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। अब पुलिस की जांच में कथित फर्जी पत्र, दस्तावेजों की सत्यता और नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया की पड़ताल होगी।
