आगरा

मुद्दा बीजेपी-कांग्रेस नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड का: राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सचिन पायलट का सरकार पर तीखा हमला

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आगरा राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने शनिवार को प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रेस वार्ता में उनके पीछे लगा पोस्टर भी चर्चा का विषय बन गया। पोस्टर में भगवान श्रीराम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उंगली पकड़कर राम मंदिर की ओर जाते हुए दर्शाया गया था, जिसमें श्रीराम की आकृति प्रधानमंत्री मोदी की तुलना में छोटी दिखाई गई। हालांकि, पायलट ने अपने संबोधन में पोस्टर का कोई उल्लेख नहीं किया, लेकिन इसकी प्रस्तुति ने राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाओं को जरूर हवा दे दी। इसके बाद पायलट ने कहा कि यदि पूरे मामले से जुड़े तथ्य सामने आ रहे हैं तो सरकार आखिर जनता को जवाब देने से क्यों बच रही है।

पायलट ने कहा कि सवाल पूछना विपक्ष नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा जांच से सच्चाई सामने नहीं आएगी और कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि जब तक जांच राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त और पूरी तरह पारदर्शी नहीं होगी, तब तक जिम्मेदार लोगों का पता नहीं चल सकेगा।

एसआईटी के गठन पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए। पायलट ने कहा कि सरकार हर बड़े विवाद में कमेटियां बनाकर समय निकालने की कोशिश करती है। उनका आरोप था कि यह केवल लीपापोती है, जबकि देश की जनता निष्पक्ष और प्रभावी जांच चाहती है।

प्रेस वार्ता में श्रद्धालुओं के चढ़ावे का मुद्दा उठाते हुए पायलट ने कहा कि यदि किसी भक्त द्वारा श्रद्धा से चढ़ाई गई वस्तु या दान का दुरुपयोग हुआ है, तो यह केवल आर्थिक मामला नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि आस्था के साथ धोखा करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने मांग की कि पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। उनका कहना था कि निष्पक्ष जांच ही यह तय करेगी कि कथित अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है और किस स्तर पर चूक हुई।

भाजपा के आरोपों पर जवाब देते हुए पायलट ने कहा कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास का है। उन्होंने कहा कि सरकार को विपक्ष से सवाल पूछने के बजाय जनता के सामने जवाब देना चाहिए।

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