पुलिस हिरासत में महिला से मारपीट के आरोप पर कोर्ट सख्त,: चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश
आगरा में पुलिस हिरासत के दौरान एक महिला के साथ कथित मारपीट और उत्पीड़न के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध चिकित्सीय रिपोर्टों और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच कराने के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया महिला के साथ अभिरक्षा में मारपीट किए जाने के संकेत सामने आए हैं।
मामला सीमा सिकरवार नामक महिला से जुड़ा है, जिसने आरोप लगाया था कि गिरफ्तारी के दौरान और बाद में उसके साथ मारपीट की गई, अभद्र व्यवहार किया गया तथा उसे शारीरिक चोटें पहुंचाई गईं। अदालत के निर्देश पर कराए गए चिकित्सीय परीक्षण और पुनः परीक्षण की रिपोर्टों में महिला के शरीर पर चोटों का उल्लेख किया गया। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने माना कि मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
चार पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच के निर्देश
अदालत ने तत्कालीन उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह, उपनिरीक्षक नीलेश शर्मा, महिला उपनिरीक्षक नेहा तथा महिला हेड कांस्टेबल सीमा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुलिस प्रशासन को विभागीय जांच कर एक माह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि अभिरक्षा में किसी व्यक्ति के साथ हिंसा या उत्पीड़न कानून और मानवाधिकारों से जुड़े स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है।
एक साल में हिरासत में प्रताड़ना के कई मामले आए सामने
आगरा में बीते एक वर्ष के दौरान हिरासत में प्रताड़ना और कथित थर्ड डिग्री के कई मामले सामने आ चुके हैं। जनवरी 2026 में छत्ता थाना क्षेत्र की जीवनी मंडी चौकी में दूध विक्रेता नरेंद्र कुशवाह ने पुलिसकर्मियों पर थर्ड डिग्री देने, तलवों पर डंडे मारने और नाखून उखाड़ने जैसे आरोप लगाए थे। मामला तूल पकड़ने पर तत्कालीन चौकी प्रभारी रविंद्र कुमार, उपनिरीक्षक सनीपाल, एआर राज बिहारी और संजय के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। विभागीय कार्रवाई के तहत कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित और लाइन हाजिर भी किया गया था, हालांकि पुलिस ने चोटों को साधारण बताया था।
रकाबगंज एनकाउंटर के बाद भी उठे थे सवाल
जून 2025 में रकाबगंज क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ के बाद गौकशी के आरोपी इमरान उर्फ बाबुआ ने अदालत में आरोप लगाया था कि पुलिस ने पहले उसके साथ मारपीट की और बाद में गोली मार दी। मामले में स्पेशल सीजेएम ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश देते हुए मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा उठाया था। बाद में कराए गए दूसरे मेडिकल परीक्षण में अतिरिक्त चोटों का उल्लेख मिलने पर मुकदमा दर्ज हुआ और जांच दूसरे थाने को सौंपी गई।
किरावली प्रकरण में पुलिसकर्मी हो चुके हैं निलंबित
इसी तरह किरावली क्षेत्र में किसान राजू शर्मा ने पुलिस पर थर्ड डिग्री देने और पैर तोड़ने का आरोप लगाया था। विभागीय जांच में तत्कालीन थाना प्रभारी नीरज सिंह, उपनिरीक्षक धर्मवीर सिंह और कांस्टेबल रवि मलिक को दोषी मानते हुए निलंबित किया गया था। मामले में कार्रवाई अभी भी न्यायालय की निगरानी में चल रही है, जबकि राज्य मानवाधिकार आयोग भी इस प्रकरण का संज्ञान ले चुका है।
