जिस बेटे को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसी पर बुजुर्ग पिता ने लगाए मारपीट के आरोप: अपनों के जख्म लेकर न्याय की चौखट पर पहुंचा 79 वर्षीय बुजुर्ग
आगरा। जिस बेटे को गोद में खिलाया, जिसके भविष्य के लिए पूरी जिंदगी मेहनत की, उसी बेटे और उसके परिवार पर एक 79 वर्षीय बुजुर्ग ने मारपीट और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। शाहगंज क्षेत्र से सामने आई यह घटना रिश्तों को झकझोर देने वाली है, जहां बुढ़ापे का सहारा बनने के बजाय अपनों पर ही बुजुर्ग पिता और उनकी विधवा बेटी को परेशान करने के आरोप लगे हैं।
देव नगर, नई आबादी, नगला छऊआ निवासी वार्टिनगटन खान उर्फ डब्लू खान ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी पत्नी ऐंजला खान का पहले ही निधन हो चुका है। बढ़ती उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण वह चलने-फिरने में असमर्थ हैं। ऐसे में उनकी विधवा बेटी ही उनके जीवन का एकमात्र सहारा बनी हुई है। वही उनकी सेवा करती है, दवा देती है, खाना बनाती है और हर जरूरत का ध्यान रखती है।
बुजुर्ग का आरोप है कि उनका बेटा सैमसन उर्फ अन्नू खान, बहू गीता खान, पोता रानू खान और पोती जैसमिन खान उनकी बेटी को उनके पास रहने नहीं देना चाहते। इसी बात को लेकर घर में अक्सर विवाद होता रहता है।
पीड़ित के अनुसार 25 मई की सुबह करीब साढ़े आठ बजे हालात इतने बिगड़ गए कि चारों आरोपियों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। शोर सुनकर रसोई में नाश्ता बना रही उनकी विधवा बेटी दौड़कर पिता को बचाने पहुंची, लेकिन उसे भी नहीं बख्शा गया। आरोप है कि उसके बाल पकड़कर जमीन पर गिरा दिया गया और बेरहमी से पीटा गया। इस मारपीट में उसके कान में गंभीर चोट आई।
बुजुर्ग का कहना है कि जिस बेटी ने पति को खोने के बाद अपने पिता की सेवा को ही जीवन का उद्देश्य बना लिया, उसी को घर से निकालने की कोशिश की गई। आरोप है कि मारपीट के दौरान उसे धमकियां भी दी गईं और कहा गया कि अगर वह यहां से नहीं गई तो उसे जिंदा नहीं छोड़ा जाएगा।
घटना के बाद बुजुर्ग पिता और उनकी बेटी न्याय की उम्मीद लेकर अधिकारियों के दरवाजे खटखटाते रहे। शिकायतों और गुहार के बाद आखिरकार पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। अब पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और बुढ़ापे का सहारा बनी बेटी को सुरक्षा मिल सकेगी।
यह घटना केवल एक परिवार का विवाद नहीं, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है कि आखिर क्यों कई बुजुर्ग अपने जीवन की संध्या में सम्मान, सुरक्षा और अपनापन पाने के लिए संघर्ष करने को मजबूर हो रहे हैं।
