अपराध

3000 की नौकरी से नशीली सिरप kingpin बनने की चौंकाने वाली कहानी: बाहुबली की मेहरबानी ने खोला अपराध का दरवाज़ा—यहीं से शुरू हुआ खेल

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चिंटू का नाम सामने आते ही आँखों के आगे चेहरा  सामने आता है कपूर खानदान की उसे हीरो का जो कभी चॉकलेटी और रोमांटिक फिल्मों के लिए जाना जाता था लेकिन यह चिंटू वह शख्स है जो नारकोटिक्स की दुनिया का बेताज बादशाह कहा जाता है…..

कभी सिर्फ 3000 रुपये महीने की नौकरी करने वाला देवेंद्र आहूजा उर्फ. चिंटू नशीली दवाओं के काले कारोबार में अंतरराष्ट्रीय गैंग का सरगना यूं ही नहीं बना। यह परिवर्तन संयोग नहीं, सुनियोजित संरक्षण की उपज रहा। आखिर एक मामूली कर्मचारी अचानक ऐसे कैसे बदल जाता है कि पूरे पूर्वांचल के नशे के सौदागर उसे ‘चिंटू डॉन’ नाम से पुकारने लगते हैं? यह सवाल स्वाभाविक है और जवाब कहीं न कहीं उस बाहुबली से शुरू होता है जिसने उसे यहां तक पहुंचाया। बाजार की चर्चाओं में यह बात गूंजती है कि चिंटू के पास आज करोड़ों का आलीशान घर है, महंगी गाड़ियां हैं, और तमाम गोदाम हैं। बात यहां खत्म नहीं होती, उसका नाम प्रतापनगर के सत्यपाल आहूजा के पुत्र की पहचान से निकलकर दवा बाजार की अंडरवर्ल्ड कहानी में बदल जाता है। वर्ष 2022 में उसकी गिरफ्तारी के बाद उसका पूरा इतिहास दवा बाजार का सबसे चर्चित विषय बन गया था। कहा जाता है कि बीते 19 वर्षों से वह नकली और नशे में प्रयोग होने वाली दवाओं और गर्भपात की दवाओं का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काला कारोबार कर रहा है।


3000 रुपये की नौकरी से ‘डॉन’ बनने तक का सफर

बाजार की हवा यही कहती है कि चिंटू का सफर महज 3000 रुपये महीने की नौकरी से शुरू हुआ। बताया जाता है कि 2008 से 2012 तक वह आगरा के फव्वारा बाजार की एक फर्म पर मामूली वेतन पर नौकरी करता था। फिर अचानक युवक नवाबिया मार्केट में ‘जय रामजी की मेडिकल स्टोर’ खोल लेता है। यहीं से उसका तेजी से विस्तार शुरू होता है—उसी मार्केट में उसकी 15 से अधिक दुकानें होने की चर्चा, कई लग्ज़री गाड़ियां, नोएडा में प्रॉपर्टी और जयपुर हाउस में आलीशान कोठी। सवाल उठता है कि इतनी दौलत इतनी जल्दी किस रास्ते से और किस संरक्षण में आई?


पूर्वांचल के बाहुबली से मुलाकात ने बदली किस्मत

नौकरी के दौरान दवा बाजार में काम करने वाले कुछ लड़कों ने चिंटू की मुलाकात पूर्वांचल के एक कुख्यात बाहुबली से कराई। इसी मोड़ ने उसकी जिंदगी पलट दी। उसने नौकरी छोड़ दी और बाहुबली के संरक्षण में नशीली दवाओं के कारोबार में उतर गया। पैसा आया, ताकत आई और पुलिस-सिस्टम से सांठगांठ भी। शायद इसी सहारे वह वर्षों तक पकड़ा नहीं गया और 2022 से पहले उसका नाम तक सामने नहीं आया, जबकि उसका नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था।


अंतरराष्ट्रीय लेवल का हाई-टेक नेटवर्क

बताया जाता है कि उसका नेटवर्क बांग्लादेश, नेपाल, बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र, मणिपुर, झारखंड और पंजाब तक फैला है। उसकी संचार प्रणाली इतनी मजबूत मानी जाती है कि वह कभी सामान्य कॉल नहीं करता, केवल व्हाट्सऐप कॉल का इस्तेमाल करता है और लगातार नंबर बदलता रहता है। बिक्री के लिए वह डार्क नेट का सहारा लेता है, जहां गतिविधियों को ट्रैक करना लगभग असंभव होता है।


ड्रोन के जरिए सीमावर्ती इलाकों में सप्लाई?

बाजार में यह भी चर्चा है कि चिंटू गैंग ड्रोन के माध्यम से सीमा पार ड्रग्स भेजता है। हालांकि इस संबंध में अभी तक ठोस सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन चर्चाएं लगातार बनी रहती हैं। बंगाल, उड़ीसा और विशाखापट्टनम से गांजा, अफीम और चरस वाराणसी में निलेश गुप्ता और प्रशांत उपाध्याय के नेटवर्क के जरिए आगरा मंगाए जाने की बात कही जाती है, और फिर आगरा से माल नोएडा, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब तक पहुंचता है।


हाई-प्रोफाइल महिलाओं और भारी संपत्ति की चर्चाएँ

चिंटू के गैंग में कई हाई-प्रोफाइल महिलाओं के शामिल होने की भी बाजार में चर्चा है। उसकी अचल संपत्ति करोड़ों में आंकी जाती है और दर्जनों महंगी गाड़ियों की बात भी सामने आती है।


2022 में गैंगवार के बाद गिरफ्तारी और बड़ा खुलासा

वर्ष 2022 में देवेंद्र आहूजा को गंगवार के बाद गिरफ्तार किया गया था। कहा जाता है कि चिंटू और अन्य कारोबारी पहले मिलकर काम करते थे और बाजार में कफ सिरप का रेट फिक्स होता था। लेकिन चिंटू गैंग ने रेट गिराकर बेचना शुरू किया, जिससे मतभेद बढ़े और एक-दूसरे का माल पकड़वाने तक मामला पहुंचा।
140 रुपये एमआरपी वाले सिरप को 940 रुपये तक बेचे जाने की कहानी ने बाजार हिला दिया। बिहार और बांग्लादेश में शराबबंदी के कारण मांग इतनी बढ़ी कि काला कारोबार फला-फूला।


बिहार–बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर सप्लाई

पश्चिम बंगाल SOG की जांच में सामने आया कि बिहार में यह सिरप 400–450 रुपये और बांग्लादेश में 900–940 रुपये में बिकता था। कहा जाता है कि इन दोनों जगहों पर लगभग 70% कफ सिरप खप जाता है। हाई-प्रोफाइल पार्टियों में भी इन सिरपों के नशे का उपयोग बताया जाता है। एजेंट पार्टी बुकिंग के जरिए सप्लाई करते थे। चिंटू 50,000 बोतल से कम की सप्लाई स्वीकार नहीं करता।


लाखों बोतलों का सौदा और 25 नवंबर 2022 की गिरफ्तारी

25 नवंबर 2022 को बंगाल पुलिस ने उसे जय रामजी की मेडिकल स्टोर से गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि कफ सिरप वाराणसी से निकलकर बंगाल होते हुए बांग्लादेश भेजा जाता है और उसके बांग्लादेशी ड्रग पेडलर्स से सीधे संपर्क हैं।
कंपनी से माल ट्रांसपोर्ट कंपनियों के जरिये अलग-अलग राज्यों और फिर विदेश भेजा जाता था। 140 रुपये का सिरप 800–900 रुपये तक बिकता था और डीलिंग कभी सौ-दो सौ की नहीं, बल्कि लाखों बोतलों की होती थी।।

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