आगरा: धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के एक गंभीर मुकदमे में फंसे चर्चित पूर्व सपा नेता और वर्तमान में एक स्वयं निर्मित हिंदूवादी संगठन के सर्वेसर्वा मनोज अग्रवाल की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। केस की विवेचना में देरी को लेकर पीड़ित पक्ष ने अब पुलिस अधिकारियों से औपचारिक शिकायत भी कर दी है।

मनोज अग्रवाल कमला नगर थाने का हिस्ट्रीशीटर  है और उन पर अपने ही पूर्व चालक के परिवार को ठगने का गंभीर आरोप है। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आरोप सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी तक सीमित नहीं, बल्कि कूट रचना कर फर्जी समझौता पत्र तैयार करने तक पहुंच चुके हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

मिनाक्षीपुरम, कमला नगर निवासी मनोज अग्रवाल के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर उत्तमपुरी गुम्मट रोड निवासी राममूर्ति चौधरी—जो बिजली विभाग से रिटायर हैं ने मुकदमा दर्ज कराया था ।

राममूर्ति चौधरी के बेटे आदित्य, मनोज अग्रवाल के यहां चालक थे। इसी दौरान मनोज ने राममूर्ति और उनकी पत्नी को भरोसा दिलाया कि वह उन्हें अच्छी लोकेशन पर प्लॉट/मकान उपलब्ध करा सकता है। परिवार ने भरोसा कर कुल 12.85 लाख रुपये मनोज अग्रवाल को दे दिए।

रुपये गए, मकान नहीं मिला

लंबा समय बीतने पर भी न प्लॉट मिला और न स्पष्ट जवाब, तब पीड़ित ने जांच कराई। तभी पता चला कि मनोज अग्रवाल कई आपराधिक मामलों में हिस्ट्रीशीटर है।

दबाव बनाने पर मनोज ने तीन चेक दिए, मगर जब उन्हें बैंक में लगाया गया तो खुलासा हुआ कि चेक का खाता वर्ष 2016 से बंद है।

कार्रवाई से बचने की कोशिश

पीड़ित ने कोर्ट में दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि मनोज अग्रवाल ने कार्रवाई से बचने के लिए उल्टा उसी परिवार के खिलाफ मुकदमा लिखाने का प्रयास किया। जब यह योजना सफल नहीं हुई, तो उसने फर्जी समझौता पत्र तैयार किया और राममूर्ति के नकली हस्ताक्षर कर दिए।

पीड़ित पक्ष के अनुसार, आज भी 11.29 लाख रुपये मनोज अग्रवाल के पास बकाया हैं।

विवेचना में देरी से नाराज पीड़ित अब उच्चाधिकारियों से न्याय की उम्मीद कर रहा है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

 

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