सिकंदरा की घटना पर वकीलों का गुस्सा,: पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
आगरा.. सिकंदरा थाने से जुड़ा एक मामला अब सिर्फ एक महिला से कथित मारपीट तक सीमित नहीं रह गया है। शहर के वकीलों ने खुलकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और पूरे मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बात सिर्फ एक घटना की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की है जिस पर आम आदमी भरोसा करता है।
आगरा बार एसोसिएशन के सभागार में हुई बातचीत के दौरान माहौल कुछ तल्ख भी दिखा। पीड़ित महिला की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता डॉ. अजीत कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सिर्फ कार्रवाई में ही नहीं, बल्कि अभिलेखों में भी हेरफेर की है। उनके मुताबिक महिला को दोपहर करीब 1:37 बजे उसके घर से उठाया गया था और इसके समर्थन में रिकॉर्ड तथा सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं। लेकिन पुलिस की जीडी में समय शाम 4:30 बजे दर्ज किया गया है।
वकीलों का कहना है कि अगर रिकॉर्ड और वास्तविक घटनाक्रम में इतना बड़ा अंतर है, तो सवाल उठना लाजिमी है। उनका आरोप है कि उच्चाधिकारियों को भी गलत जानकारी दी गई। पीड़ित महिला को कथित तौर पर 11 चोटें आईं, जिनमें फ्रैक्चर होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में मामले को सामान्य पुलिस जांच पर छोड़ देना उचित नहीं होगा।
डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि पीड़िता को हाईकोर्ट में पूरा कानूनी सहयोग दिया जाएगा और न्यायिक या स्वतंत्र जांच की मांग को मजबूती से उठाया जाएगा। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अरविंद मिश्रा ने एक ऐसा सवाल पूछा जो अक्सर शहर की कानाफूसी में सुनाई देता है—”जब विवाद खड़ा होता है, तब थानों के सीसीटीवी आखिर बार-बार खराब कैसे निकल आते हैं?” उनका कहना था कि यदि आरोप पुलिस पर ही हों, तो निष्पक्ष विवेचना को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।
आगरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष बाबू परमार और सचिव विनोद कुमार शुक्ल ने भी साफ शब्दों में कहा कि कानून किसी को भी मारपीट का अधिकार नहीं देता, फिर चाहे वह वर्दी में ही क्यों न हो।
बार के इस कार्यक्रम में पीड़ित महिला के अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील वशिष्ठ, आर.के. नीलम, वरुण गौतम समेत कई अधिवक्ता मौजूद रहे। फिलहाल, शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या उठे सवालों के जवाब भी उतनी ही गंभीरता से तलाशे जाएंगे, जितनी गंभीरता से ये आरोप लगाए गए हैं।
