अपराध

सावधान! बच्चों से जुड़े अश्लील वीडियो मोबाइल में रखना या शेयर करना भी अपराध: आगरा में साइबर टिपलाइन की रिपोर्ट पर दो मुकदमे दर्ज, दो आरोपियों की पहचान; पुलिस ने लोगों को दी सख्त चेतावनी

0
file_00000000fa5c7208be6cadfbb9e740b9

पुलिस की चेतावनी- मोबाइल में मिला CSAM तो हो सकती है गिरफ्तारी

आगरा। अगर आपके मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या क्लाउड स्टोरेज में बच्चों से जुड़े अश्लील फोटो या वीडियो (Child Sexual Abuse Material-CSAM) मौजूद हैं, या आप ऐसी सामग्री सोशल मीडिया अथवा मैसेजिंग ऐप के जरिए किसी अन्य व्यक्ति को भेजते हैं, तो सावधान हो जाइए। यह केवल अनैतिक कृत्य नहीं, बल्कि गंभीर दंडनीय अपराध है। अंतरराष्ट्रीय साइबर निगरानी तंत्र और भारतीय साइबर एजेंसियां ऐसे मामलों पर लगातार नजर रख रही हैं। आगरा में हाल ही में दर्ज हुए दो मुकदमे इस बात का बड़ा उदाहरण हैं।

क्या है साइबर टिपलाइन?

दुनिया भर में बच्चों से जुड़े यौन शोषण की ऑनलाइन सामग्री की निगरानी के लिए अमेरिका के National Center for Missing and Exploited Children (NCMEC) की CyberTipline काम करती है। सोशल मीडिया कंपनियां, इंटरनेट सेवा प्रदाता और आम नागरिक संदिग्ध सामग्री की सूचना यहां देते हैं। सत्यापन के बाद रिपोर्ट संबंधित देशों की एजेंसियों को भेजी जाती है।

भारत में यह रिपोर्ट नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) को भेजी जाती है। इसके बाद NCRB संबंधित राज्य की साइबर पुलिस को सूचना उपलब्ध कराता है, जिसके आधार पर जांच और कानूनी कार्रवाई शुरू होती है।

आगरा में दो मामलों में कार्रवाई

आगरा साइबर क्राइम पुलिस थाने में हाल ही में साइबर टिपलाइन से प्राप्त दो अलग-अलग रिपोर्टों के आधार पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पहले मामले में एक इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री प्रसारित किए जाने के आरोप में रिचर्ड केल्विन डॉयल, पुत्र एडविन डॉयल, निवासी लाल कुर्ती, आगरा के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 67B के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

दूसरे मामले में एक अन्य इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री प्रसारित करने के आरोप में अरुण कुमार, पुत्र विजेंद्र सिंह, निवासी रामबाग बस्ती, कुबेरपुर, आगरा के खिलाफ भी आईटी एक्ट की धारा 67B के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस दोनों मामलों में डिजिटल साक्ष्य जुटाकर आगे की जांच कर रही है।

केवल अपलोड करने वाले ही नहीं, देखने और सेव करने वाले भी कार्रवाई के दायरे में

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों से जुड़े अश्लील वीडियो या तस्वीरों को केवल अपलोड करना ही नहीं, बल्कि उन्हें डाउनलोड करना, मोबाइल या लैपटॉप में सुरक्षित रखना, क्लाउड स्टोरेज में सेव करना या किसी अन्य व्यक्ति को भेजना भी गंभीर कानूनी परिणाम पैदा कर सकता है। डिजिटल फोरेंसिक जांच के दौरान डिलीट की गई फाइलें भी कई मामलों में रिकवर की जा सकती हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed