30-40 लोगों को जोड़ने के बाद आगे नेटवर्क बढ़ाने का दावा, पांच राज्यों तक संपर्क की बात

आगरा। बीमारी और परेशानियां दूर करने के दावे के साथ आयोजित चंगई की सभा से शुरू हुई पुलिस की जांच अब कथित तौर पर कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की पड़ताल तक पहुंच गई है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ और बरामद दस्तावेजों में लोगों को पहले सभाओं से जोड़ने, फिर उन्हें समूह में शामिल करने और एक निश्चित संख्या पूरी होने के बाद आगे नए लोगों को जोड़ने की जिम्मेदारी दिए जाने का दावा सामने आया है।

पुलिस के मुताबिक, मामले की शुरुआत गांव में आयोजित एक सभा की जानकारी से हुई। सभा की तस्वीरों और मौके पर मिले तथ्यों की जांच के बाद वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की गई। इसी पूछताछ में कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली से जुड़ी कई जानकारियां सामने आने का दावा किया गया।

पहले चंगई की सभा, फिर संपर्क और नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर लोगों की बीमारी और निजी परेशानियों को दूर करने का दावा कर उन्हें चंगई की सभाओं में बुलाया जाता था। आरोप है कि इसी प्रक्रिया के जरिए नए लोगों से संपर्क बढ़ाया जाता और उन्हें समूह से जोड़ा जाता था।

जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, करीब 30-40 लोगों को जोड़ने के बाद संबंधित व्यक्ति को आगे नए लोगों को तैयार करने की जिम्मेदारी दिए जाने का दावा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित व्यवस्था में कौन किसके संपर्क में था और जानकारी किस स्तर तक पहुंचाई जाती थी।

ईस्ट-वेस्ट ग्रुप से कई राज्यों के जुड़ने का दावा

पूछताछ में कथित ईस्ट-वेस्ट ग्रुप का भी उल्लेख सामने आया है। पुलिस के अनुसार, इस समूह में राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब समेत कई राज्यों के लोगों के जुड़े होने की जानकारी मिली है। अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों को जोड़ने के लिए अलग-अलग समूह बनाए जाने का भी दावा किया गया है।

पुलिस अब इन संपर्कों की वास्तविकता और कथित नेटवर्क में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच कर रही है।

मासिक रिपोर्ट में सभाओं का हिसाब

जांच के दौरान मिले दस्तावेजों में “Monthly Report of This Month” नाम से रिपोर्ट तैयार किए जाने का दावा किया गया है। इसमें महीने के दौरान आयोजित सभाओं की संख्या, शामिल लोगों और गतिविधियों का विवरण दर्ज होने की बात सामने आई है।

जुलाई की एक रिपोर्ट में राजस्थान में एक व्यक्ति द्वारा सात चंगई की सभाएं आयोजित किए जाने का उल्लेख होने का दावा है। इसके साथ अगले महीने का “Target for the Next Month” भी दर्ज होने की बात सामने आई है।

सभाओं की संख्या के आधार पर भुगतान का दावा

जांच से जुड़े लोगों के अनुसार, गतिविधियों और सभाओं की संख्या के आधार पर भुगतान किए जाने की बात भी पूछताछ में सामने आई है। एक अन्य दस्तावेज में अगस्त महीने के फंड और ट्रेनिंग से जुड़ी प्रविष्टियां होने का दावा किया गया है।

धौलपुर और झुंझुनू सहित विभिन्न स्थानों पर प्रशिक्षण के सामने रकम दर्ज होने की बात कही गई है। एक प्रविष्टि में 67,250 रुपये की राशि का उल्लेख बताया गया है।

हालांकि, इन रकमों का वास्तविक स्रोत, भुगतान का उद्देश्य और धन के प्रवाह की पुष्टि अभी जांच का विषय है।

ऑनलाइन ट्रेनिंग की कड़ी भी सामने आई

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में ऑनलाइन प्रशिक्षण का भी जिक्र हुआ है। दावा है कि कुछ लोगों को Zoom, Signal और IMO जैसे माध्यमों से प्रशिक्षण दिया जाता था। प्रशिक्षण में लोगों से संवाद करने और उन्हें कथित तौर पर प्रभावित करने के तरीकों की जानकारी दिए जाने का आरोप सामने आया है।

चार लोगों की भूमिका की जांच

पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए चार लोगों में दो राजस्थान से बताए गए हैं। इनमें एक जयपुर का निवासी बताया गया है, जबकि दूसरा मूल रूप से गोरखपुर का रहने वाला है और लंबे समय से जयपुर में रह रहा है।

अब जांच का फोकस कथित नेटवर्क के संपर्कों, फंडिंग, प्रशिक्षण, चंगई की सभाओं और अलग-अलग राज्यों में सक्रिय लोगों की भूमिका पर है। पुलिस दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और बयानों के आधार पर कथित नेटवर्क की वास्तविक संरचना की जांच कर रही है।

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