तीन नामांकन पर्चे खरीदकर अखिलेश यादव ने बढ़ाई हलचल, 37 वोट के गणित के बीच तीसरी सीट के लिए ‘सरप्राइज प्लान’ पर नजर
आगरा । उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। संख्या बल के हिसाब से दो सीटों की स्थिति मजबूत होने के बावजूद समाजवादी पार्टी ने तीसरी सीट पर भी प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है। मंगलवार को पहले दिन सपा की ओर से तीन नामांकन पत्र खरीदे गए। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीसरा प्रत्याशी कौन होगा और उसके लिए जरूरी वोटों का इंतजाम कैसे किया जाएगा।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधायकों के साथ बैठक में राज्यसभा चुनाव को लेकर मंथन किया। पार्टी की ओर से प्रो. रामगोपाल यादव की उम्मीदवारी लगभग तय है और वह बुधवार को नामांकन दाखिल करने वाले हैं। दूसरे नाम के तौर पर पूर्व मुख्य सचिव और पूर्व आईएएस अधिकारी आलोक रंजन की चर्चा है। तीसरे नाम को लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है।
तीन पर्चे क्यों खरीदे, यही सबसे बड़ा सवाल
सपा के पास मौजूदा विधानसभा संख्या के हिसाब से दो राज्यसभा सीटों के लिए पर्याप्त प्रथम वरीयता वोट हैं। इसके बावजूद तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने का फैसला चुनावी गणित को दिलचस्प बना रहा है।
राज्यसभा चुनाव में इस बार प्रभावी विधायक संख्या 397 है। एक सीट जीतने के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत होगी। सपा के 101 विधायक हैं और कांग्रेस के दो विधायकों को जोड़ने पर यह संख्या 103 तक पहुंचती है। दो सीटों के लिए 74 वोट खर्च होने के बाद तीसरे उम्मीदवार के लिए करीब 29 वोट ही बचेंगे। ऐसे में अतिरिक्त समर्थन जुटाना जरूरी होगा।
तीसरे चेहरे से PDA समीकरण साधने की तैयारी?
सपा की तीसरी सीट की रणनीति को उसके सामाजिक और राजनीतिक समीकरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी पहले से संकेत देती रही है कि तीसरे उम्मीदवार के जरिए PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को संदेश देने की कोशिश हो सकती है।
तीसरे उम्मीदवार के तौर पर सलीम इकबाल शेरवानी, चौधरी रूद्रसेन और अरविंद सिंह गोप समेत कुछ अन्य नामों की चर्चा सामने आई है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व की ओर से किया जाना बाकी है।
क्रॉस वोटिंग के दावों ने बढ़ाया रोमांच
तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त वोट जुटाने के सवाल पर सपा नेताओं की ओर से विपक्षी खेमे के कुछ विधायकों के समर्थन के दावे किए जा रहे हैं। सपा विधायक आरके वर्मा ने एनडीए के करीब 12 विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने का दावा किया है। हालांकि यह राजनीतिक दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में सिर्फ संख्या बल ही नहीं, बल्कि विधायकों की प्रथम वरीयता और चुनाव के दौरान संभावित राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।
16 अक्टूबर को होगा मतदान
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी।
अब नजर इस बात पर है कि सपा अपने तीसरे पर्चे पर किस चेहरे का नाम लिखती है। तीसरे उम्मीदवार के नाम के साथ ही यह भी साफ होगा कि अखिलेश यादव का यह दांव सिर्फ राजनीतिक संदेश तक सीमित है या पार्टी ने अतिरिक्त वोटों का कोई ठोस गणित भी तैयार किया है।
