आगरा के पूनियापाड़ा का मामला: ADA ने अनूप बंसल को जारी किया नया नोटिस, संपत्ति मालिकों की ओर से पुराने जर्जर मकानों का हवाला देकर दिया जवाब; सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख और 2025 के शमन नियमों की कसौटी पर निर्माण

आगरा। पहले पुराने मकानों का हवाला, फिर करीब 160 वर्ग मीटर जमीन पर 9 फ्लैट और तीन दुकानों का निर्माण। अब सवाल यह है कि बिना स्वीकृत नक्शे के तैयार हुए इस भवन को क्या शमन शुल्क जमा करके वैध कराया जा सकता है? आगरा के पूनियापाड़ा क्षेत्र में सामने आए इस मामले ने आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) की निगरानी और अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक, मकान संख्या 24/217 और 24/218 को मिलाकर करीब 160 वर्ग मीटर जमीन पर भवन तैयार किया गया है। संपत्ति प्रतिमा बंसल और वसीमुद्दीन के नाम बताई गई है। भवन में 9 फ्लैट और तीन दुकानें बनाई गई हैं। फ्लैटों में लोग रह रहे हैं, जबकि शिकायत के बाद दुकानों पर रोक लगा दी गई है। निर्माण पूरा होने के बावजूद अब तक मामले का अंतिम निस्तारण सामने नहीं आया है।

ADA के नोटिस पर अनूप बंसल ने दिया जवाब

आगरा विकास प्राधिकरण की ओर से इस मामले में अनूप बंसल के नाम नोटिस जारी किया गया था। इसके जवाब में अनूप बंसल ने संपत्ति मालिकों की ओर से हस्तलिखित जवाब दाखिल किया है।

जवाब में पुराने मकानों का हवाला देते हुए बताया गया है कि मौके पर पहले से मकान बने हुए थे, जिनकी हालत जर्जर हो गई थी। जवाब में मरम्मत और पुनर्निर्माण की आवश्यकता बताई गई है। साथ ही दोनों मकानों के नंबर 24/217 और 24/218 का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, पुराने मकानों की जर्जर स्थिति का हवाला देना अपने आप में 9 फ्लैट और तीन दुकानों वाले नए भवन के निर्माण की अनुमति नहीं बन जाता। इसके लिए स्वीकृत नक्शा अथवा लागू नियमों के तहत वैध अनुमति जरूरी है।

शमन के नाम पर पेनल्टी देकर बच जाएगा पूरा भवन?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल शमन को लेकर है। शमन का अर्थ है निर्धारित नियमों और सीमाओं के तहत कुछ अनधिकृत निर्माणों को शुल्क लेकर नियमित करना। लेकिन शमन कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है, जिसके तहत हर अवैध निर्माण को पेनल्टी जमा कराकर वैध घोषित किया जा सके।

उत्तर प्रदेश मॉडल भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2025 के अध्याय 16 में शमन की स्पष्ट व्यवस्था है। इसके तहत प्राधिकरण को जांचना होता है कि निर्माण निर्धारित शमन सीमा में आता है या नहीं। नियमों में कई श्रेणियों के निर्माण को शमन से बाहर रखा गया है। इनमें मास्टर प्लान के विपरीत भू-उपयोग, सरकारी या सार्वजनिक जमीन पर निर्माण, अवैध कॉलोनी और अनिवार्य अग्निशमन मानकों का उल्लंघन शामिल है।

ऐसे में 160 वर्ग मीटर के भूखंड पर बने 9 फ्लैट और तीन दुकानों के भवन में FAR, ग्राउंड कवरेज, सेटबैक, पार्किंग, भू-उपयोग और अग्निशमन व्यवस्था की तकनीकी जांच जरूरी है। केवल पेनल्टी जमा करने से पूरे भवन को वैधता नहीं मिल सकती।

सुप्रीम कोर्ट का 2025 का फैसला भी महत्वपूर्ण

30 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कनीज अहमद बनाम सबुद्दीन मामले में अवैध निर्माण को नियमित कराने की मांग पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि आवश्यक अनुमति के बिना बनाए गए अवैध निर्माणों के मामले में अदालतों को नियमितीकरण का रास्ता आसानी से नहीं देना चाहिए। फैसले में अवैध निर्माण के खिलाफ कानून के सख्त अनुपालन पर जोर दिया गया।

दोनों फैसलों से स्पष्ट है कि अवैध निर्माण को मनमाने तरीके से संरक्षण नहीं दिया जा सकता और न ही प्राधिकरण कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार करके कार्रवाई कर सकता है।

ADA की कार्यप्रणाली पर पांच बड़े सवाल

  • बिना स्वीकृत नक्शे के 9 फ्लैट और तीन दुकानों का निर्माण पूरा कैसे हो गया?
  • क्या पुराने मकानों के पुनर्निर्माण के नाम पर नया बहुमंजिला भवन तैयार किया गया?
  • क्या संपत्ति मालिकों ने शमन के लिए आवेदन किया है?
  • क्या ADA ने तकनीकी जांच में भवन को शमन योग्य माना है?
  • भवन में रह रहे लोगों की सुरक्षा, पार्किंग और अग्निशमन व्यवस्था की जांच किस स्तर पर हुई है?

पेनल्टी नहीं, नियमों की कसौटी पर होना चाहिए फैसला

अब इस मामले में आगरा विकास प्राधिकरण की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्राधिकरण को भवन का स्थलीय निरीक्षण कर यह स्पष्ट करना होगा कि कौन-सा निर्माण शमन योग्य है और कौन-सा नहीं। यदि पूरा या कोई हिस्सा शमन योग्य नहीं है तो नियमानुसार कार्रवाई जरूरी होगी। वहीं, शमन योग्य हिस्से को भी सक्षम अधिकारी की विधिवत स्वीकृति के बाद ही नियमित माना जा सकता है।

सवाल सिर्फ पूनियापाड़ा के एक भवन का नहीं है। सवाल यह है कि क्या आगरा में पहले बिना नक्शे के बहुमंजिला भवन खड़े कर दिए जाएंगे और बाद में पेनल्टी जमा करके उन्हें वैध कराने का रास्ता तलाशा जाएगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed