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अपंजीकृत दस्तावेज के आधार पर आपराधिक कार्रवाई नहीं: हाईकोर्ट: सिकंदरा के मुकदमे में आरोपी मून गोयल को अग्रिम जमानत

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आगरा । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र में दर्ज एक मामले में आरोपी मून गोयल को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए कहा कि केवल अपंजीकृत दस्तावेज को आधार बनाकर किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।

न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की एकल पीठ ने मुकदमा अपराध संख्या 255/2025 में सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है।

सुनवाई के दौरान आरोपी मून गोयल की ओर से अधिवक्ता अजय कुमार पांडेय एवं सुशील वरद नाथ दुबे ने पक्ष रखते हुए कहा कि मामला मूल रूप से दीवानी प्रकृति का है, जिसे आपराधिक रंग दिया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि एफआईआर का मुख्य आधार 22 नवंबर 2023 का एक कथित बंधक विलेख है, जो अपंजीकृत दस्तावेज है और ऐसे दस्तावेज के आधार पर आपराधिक दायित्व तय नहीं किया जा सकता।

बचाव पक्ष ने अदालत को आश्वस्त किया कि आरोपी जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगा तथा अदालत की सभी शर्तों का पालन करेगा। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता राकेश कुमार वर्मा के सहयोगी रामजतन यादव तथा सरकारी अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी अग्रिम जमानत का हकदार है। अदालत ने गिरफ्तारी की स्थिति में मून गोयल को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों पर रिहा करने का आदेश दिया।

सख्त शर्तों के साथ मिली राहत

अदालत ने आरोपी को जांच में सहयोग करने, पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर उपस्थित होने, बिना अनुमति देश न छोड़ने तथा गवाहों को प्रभावित न करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत निरस्त की जा सकती है।

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