आगरा। ठेका पाने की दौड़ में अनुभव का सहारा लिया, लेकिन सत्यापन में वही अनुभव फर्जी दस्तावेजों का खेल निकल गया। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के नाम से लगाए गए अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच हुई तो वहां से साफ जवाब आया कि ऐसे प्रमाण पत्र जारी ही नहीं किए गए।
मामला मैसर्स हनुमान इंटरप्राइजेज और उसके प्रोपराइटर विनोद कुमार कुकरेजा से जुड़ा है। फर्म ने आगरा विकास प्राधिकरण में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए श्रेणी-बी (सिविल) में ठेकेदारी पंजीकरण कराने को आवेदन किया था। आवेदन के साथ मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण, मथुरा के नाम से जारी बताए गए अनुभव प्रमाण पत्र भी लगाए गए थे।
एडीए ने जब इन प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया तो 29 अगस्त 2026 को मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण से जवाब आया कि संबंधित अनुभव प्रमाण पत्र उसके द्वारा हनुमान इंटरप्राइजेज को जारी ही नहीं किए गए हैं। यानी जिस कागज के सहारे ठेकेदारी में अनुभव साबित करने की कोशिश हुई, सत्यापन में उसी की असलियत सामने आ गई।
इसके बाद आगरा विकास प्राधिकरण ने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए हनुमान इंटरप्राइजेज और प्रोपराइटर विनोद कुमार कुकरेजा को तीन साल की अवधि के लिए निविदा प्रक्रिया में प्रतिभाग करने से डिबार कर दिया।
‘अनुभव’ दिखाकर ठेका लेने पहुंचे थे, सत्यापन में अनुभव ही फर्जी निकला—एडीए ने तीन साल के लिए ठेके की दौड़ से बाहर कर दिया।
