आगरा में नकली व अवैध दवाओं के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़,: डेढ़ करोड़ के ‘फिजिशियन सैंपल्स’ के साथ अवैध गोदाम सीज
- प्रदेश भर के 29 औषधि निरीक्षकों की संयुक्त टीम ने तीन दिनों तक चलाया महा-अभियान;
- कई नामी फर्मों पर गिरी गाज, बिक्री प्रतिबंधित।
आगरा(विशेष संवाददाता):उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने नकली (स्पूरियस), काउंटरफीट दवाओं और अवैध रूप से बेचे जा रहे फिजिशियन सैंपल्स के एक बड़े सिंडिकेट के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. विभाग की विशेष संयुक्त टीम ने पिछले तीन दिनों (21 मई से 23 मई) से ताजनगरी आगरा में सघन छापेमारी कर दवाओं के इस काले कारोबार की रीढ़ तोड़ दी है. गोपनीयता बनाए रखने के लिए इस विशेष टीम में प्रदेश भर से 29 औषधि निरीक्षकों (Drug Inspectors) को शामिल किया गया था.
एक्सप्रेसवे नेटवर्क का फायदा उठा रहे थे असामाजिक तत्व
विभाग के संज्ञान में आया था कि उत्तर प्रदेश के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, सड़कों की बेहतरीन कनेक्टिविटी और दिल्ली-एनसीआर से भौगोलिक निकटता का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व नकली दवाओं का अवैध बाजार विकसित करने का प्रयास कर रहे थे. इस पूरे नेटवर्क और सप्लाई चेन को जड़ से उखाड़ने के लिए विभाग ने एक व्यापक रणनीति के तहत आगरा को मुख्य केंद्र के रूप में चिन्हित किया.
पकड़ी गईं तीन गंभीर अनियमितताएं:
अभियान के दौरान मुख्य रूप से तीन प्रकार के बड़े अपराध और गंभीर उल्लंघन सामने आए हैं:
1. नकली (Counterfeit) दवाओं का व्यापार:नामी राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड्स के नाम पर हूबहू नकली दवाएं बेची जा रही थीं.
2. एक्सपायरी दवाओं की री-लेबलिंग:एक्सपायर हो चुकी दवाओं पर नई मैन्यूफैक्चरिंग व एक्सपायरी तिथियों के फर्जी लेबल लगाकर उन्हें दोबारा बाजार में खपाया जा रहा था.
3. सरकारी व फिजिशियन सैंपल्स की अवैध बिक्री: ‘Physician Sample’ और सरकारी सप्लाई की दवाओं से वैधानिक चेतावनी हटाकर उन्हें ऊंचे दामों पर बेचने के लिए भंडारित किया गया था.
झूलेलाल मार्केट में मिला अवैध ‘सीक्रेट गोदाम’, डेढ़ करोड़ की दवाएं बरामद
इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर टीम ने फुव्वारा (कोतवाली) स्थित झूलेलाल मार्केट में एक गुप्त ठिकाने को चिन्हित किया. यहाँ ज्योति ड्रग हाउस (स्वामित्व: नारायण दास हंसराजानी) के अघोषित परिसर प्रॉपर्टी की तीसरी मंजिल पर अवैध रूप से संचालित एक बड़ा गोदाम पकड़ा गया. यह गोदाम एक कर्मचारी किशोर मेहता के नाम पर किराए पर लिया गया था.
यहाँ से Macleods, Dr. Reddy’s, Lupin, Alkem, Glenmark, Zydus सहित 30 से अधिक नामी कंपनियों की बहुचर्चित औषधियां (जैसे Dynapar, Pantop-D SR, Allegra, Betadine, Candid आदि) भारी मात्रा में “NOT FOR SALE” फिजिशियन सैंपल के रूप में बरामद हुईं. बाजार में इनकी अनुमानित कीमत 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है. मौके पर कोई दस्तावेज न मिलने के कारण इस पूरे अवैध स्टॉक को जब्त करने की कार्रवाई की गई.
इन प्रमुख फर्मों पर हुई बड़ी कार्रवाई:
जांच दल द्वारा रिकॉर्ड न दिखाने वाले मेडिकल स्टोर्स की लगभग ₹19.38 लाख की दवाओं की बिक्री पर तुरंत रोक लगाई गई. इसके अलावा कोल्ड-चेन मानकों का उल्लंघन करने पर ₹3.6 लाख की दवाएं सीज की गईं. प्रमुख फर्मों का विवरण इस प्रकार है:
साहनी मेडिकल एजेंसी: रिकॉर्ड में गड़बड़ी पर ₹5 लाख का स्टॉक फ्रीज. महंगे इंजेक्शन के बिल न होने पर बिक्री प्रतिबंधित.
जीत केमिस्ट:कोल्ड-चेन न मिलने पर ₹16 लाख के महंगे इंजेक्शंस का स्टॉक फ्रीज और बिक्री पर रोक.
महादेव मेडिकल :कोल्ड-चेन उल्लंघन पर इंजेक्शंस सीज, बिल न मिलने पर बिक्री प्रतिबंधित.
युग फार्मा (हिंग की मंडी):जीवनरक्षक इंसुलिन पेंस का भारी स्टॉक बिना कोल्ड-चेन और बिना बिल के मिला, ₹3.6 लाख की दवाएं सीज.
नंदन फार्मा: अत्यंत संवेदनशील कोल्ड-चेन बायोलॉजिक्स (Toujeo Solo Star Insulin Pens आदि) का असुरक्षित भंडारण मिलने पर बिक्री प्रतिबंधित.
श्री बिहारी जी फार्मा:यहाँ नामी ब्रांड ‘O2’ (Ofloxacin & Ornidazole) टैबलेट का संदिग्ध नकली (काउंटरफीट) बैच मिला, ₹55,000 का स्टॉक फ्रीज.
जय श्री राम फार्मा: लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद संचालित, 4 नमूने लिए गए.
गणेश श्री एंटरप्राइजेस व श्री G.L.S. फार्मा: स्टॉक फ्रीज कर सैंपलिंग की गई.
वीना एंटरप्राइजेस: संदिग्ध Kenacort vials के ₹58,600 मूल्य के स्टॉक की बिक्री पर अग्रिम आदेशों तक रोक.
इस पूरे अभियान के दौरान पोैरवाल मेडिकल, द्वारिकाधीश, राधे कृपा, शारदा व एकांश फार्मा सहित विभिन्न प्रतिष्ठानों से जांच हेतु कुल 48 वैधानिक नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं.
जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ पर दर्ज होगी FIR, लागू हुई नई सोप
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार, यह संपूर्ण अभियान 11 मार्च 2026 को जारी की गई नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के कड़े अनुपालन के तहत चलाया जा रहा है ताकि कानूनी कार्रवाई में कोई त्रुटि न रहे.
विभाग ने स्पष्ट किया है कि इंसुलिन जैसी अति-संवेदनशील दवाओं के असुरक्षित भंडारण को जनस्वास्थ्य के लिए उतना ही बड़ा अपराध माना जाएगा जितना नकली दवाओं का निर्माण. इस पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए दोषी व्यक्तियों और फर्मों के खिलाफ संबंधित थानों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कोर्ट में केस दाखिल किया जा रहा है. भविष्य में ‘बैक-ट्रैकिंग’ रणनीति के तहत ऐसे अघोषित भूमिगत गोदामों को ढूंढकर पूरे प्रदेश में ऐसी ही सख्त कार्रवाई की जाएगी.
