दिल्ली से फर्जी दस्तावेजों के जरिए मंगाई जाती थी प्रतिबंधित सिरप, मेडिकल स्टोर की जगह नशे के कारोबार में खपाने का आरोप

बांदा/आगरा। प्रतिबंधित कोडीन सिरप की तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद बांदा पुलिस की जांच अब आगरा और दिल्ली तक पहुंच गई है। एसओजी और बिसंडा थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने लोकेशन ट्रेस करते हुए आगरा से मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे प्रियंशु उर्फ किशन पुत्र मुन्ना को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, प्रियंशु दिल्ली से कोडीन सिरप लाकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए उसकी सप्लाई करता था।

3 सितंबर को पकड़ा गया था बड़ा खेप

पूरे मामले की शुरुआत 3 सितंबर 2026 को हुई, जब यूपी एसटीएफ और थाना बिसंडा की संयुक्त टीम ने बिसंडा के पास एक डीसीएम और कार को पकड़ा। मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। तलाशी में 250 पेटियों में करीब 30 हजार शीशियां कोडीन सिरप बरामद हुई थीं। दोनों वाहनों को सीज कर मुख्य आरोपी प्रियंशु की तलाश शुरू की गई थी।

यह कार्रवाई एसपी पलाश बंसल के निर्देशन में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन ईगल’ के तहत की गई। एसपी शिवराज के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी बबेरू कृष्णकांत त्रिपाठी के नेतृत्व में बिसंडा पुलिस और एसओजी की टीम ने आगरा पहुंचकर आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। इसके बाद टीम ने प्रियंशु को गिरफ्तार कर लिया।

प्रियंशु के जीजा के नाम मिली हमीरपुर की फर्म

जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी हमीरपुर की फर्म के रूप में सामने आई है। पुलिस की गिरफ्त में आए प्रियंशु के मुताबिक, हमीरपुर की यह फर्म उसके जीजा के नाम पर है, जिसके माध्यम से माल लाया गया था। पूछताछ में उसने कथित तौर पर रोहित पांडेय को इस कारोबार का सरगना बताया है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि रोहित के पिता करीब 40 वर्षों से मेडिकल लाइन के कारोबार से जुड़े बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इसी नेटवर्क के जरिए कोडीन सिरप को मेडिकल स्टोर की सामान्य सप्लाई के बजाय नशे के कारोबार में खपाया जा रहा था।

फर्जी दस्तावेजों से मेडिकल स्टोर के बजाय नशे के कारोबार में सप्लाई

जांच के मुताबिक, अतर्रा, बांदा, चित्रकूट और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में मेडिकल स्टोर के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर कोडीन सिरप की सप्लाई की जाती थी। आरोप है कि सिरप के रैपर तक बदल दिए जाते थे और इसके बाद इसे महंगे दामों में बेचा जाता था।

यानी कागजों में दवा की सप्लाई दिखाई जाती थी, जबकि पुलिस की जांच के अनुसार वास्तविक इस्तेमाल नशे के कारोबार में किया जा रहा था।

दिल्ली की फर्म से मांगा जा रहा पूरा रिकॉर्ड

अब पुलिस और औषधि सुरक्षा विभाग की जांच का फोकस दिल्ली की उस फर्म पर है, जहां से कोडीन सिरप की सप्लाई होने की बात सामने आई है। संबंधित कंपनी से पत्राचार कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि—

कोडीन सिरप की सप्लाई कब से हो रही थी?

अब तक कितनी मात्रा में माल भेजा गया?

किन-किन फर्मों और लोगों को माल सप्लाई किया गया?

सप्लाई के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ?

फर्जी दस्तावेज तैयार करने में कौन-कौन लोग शामिल थे?

पुलिस इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने और पूरे सप्लाई नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।

अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार

बड़े पैमाने पर डीसीएम से कोडीन सिरप बरामद होने के मामले में अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी बताई गई है। पुलिस के अनुसार पहले गिरफ्तार आरोपियों में धीरेन्द्र पुत्र भागवत निवासी नहर पुरवा, बिसंडा; प्रवीण उर्फ लक्की पुत्र स्वर्गीय दयाराम निवासी लखन कॉलोनी, अतर्रा; रोहित पुत्र कालूराम निवासी रामलीला मैदान, अतर्रा; डीसीएम चालक शेखर पुत्र राजकुमार निवासी ग्राम भैना, थाना बहादुरगढ़, जनपद हापुड़ शामिल हैं। ये आरोपी जेल में बताए गए हैं।

पुलिस टीम में एसओजी प्रभारी आनंद कुमार, बिलगांव चौकी प्रभारी गौरव मिश्रा, सिपाही अक्षय प्रताप सिंह, मनीष मिश्रा और प्रतीक सिंह शामिल रहे।

जांच का अगला निशाना कौन?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिल्ली से लेकर हमीरपुर, बांदा, अतर्रा, चित्रकूट और आगरा तक फैले इस कथित नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। पुलिस दस्तावेजों और सप्लाई रिकॉर्ड की पड़ताल कर नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।

पुलिस की जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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