अपराध

संपत्ति विवाद में बहन की हत्या करने वाले भाई को फांसी,: अदालत ने कहा- “यह मानवता को झकझोर देने वाला अपराध”

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रिश्तों को शर्मसार करने वाले हत्याकांड में बड़ा फैसला

आगरा। अदालत ने संपत्ति विवाद में अपनी सगी बहन की गोली मारकर हत्या करने और भाभी पर जानलेवा हमला करने वाले दोषी ललित चौधरी उर्फ निक्कू को फांसी की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-5) मृदुल दुबे ने मामले को “विरल से विरलतम” श्रेणी का मानते हुए यह सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर 4 लाख 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

दुकान के किराए को लेकर शुरू हुआ था विवाद

अभियोजन के अनुसार, शाहगंज थाना क्षेत्र के जोगी पाड़ा निवासी ललित चौधरी का अपने परिवार के साथ दुकान और उसके किराए को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। आरोप है कि वह परिवार के हिस्से की दुकान का किराया कई महीनों से स्वयं रख रहा था। इसी विवाद को लेकर परिवार में लगातार तनाव बना हुआ था।

ताला लगाने पहुंचीं महिलाएं, शुरू हो गई फायरिंग

26 नवंबर 2022 को नीलू चौधरी और उनकी ननद पूनम चौधरी अपने हिस्से की दुकान पर ताला लगाने पहुंचीं। इसी दौरान आरोपी वहां पहुंच गया और दोनों पक्षों के बीच कहासुनी होने लगी। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर ललित ने अवैध हथियार निकालकर दोनों महिलाओं पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।

फायरिंग में पूनम चौधरी को छह गोलियां लगीं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं नीलू चौधरी गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस पर भी किया हमला

वारदात के दो दिन बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त अवैध पिस्टल बरामद की गई। पुलिस के अनुसार, बरामदगी के समय आरोपी ने भागने की कोशिश की और तत्कालीन थानाध्यक्ष पर फायर करने का प्रयास भी किया। हालांकि कारतूस मिसफायर हो गया और पुलिस अधिकारी बाल-बाल बच गए। इस घटना में आरोपी के खिलाफ अलग मुकदमा दर्ज किया गया।

सुरक्षा कारणों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई गवाही

मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य गवाह और घायल नीलू चौधरी की सुरक्षा को देखते हुए अदालत ने विशेष व्यवस्था की। उनकी गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज कराई गई। अभियोजन पक्ष ने चिकित्सकीय रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों सहित कई महत्वपूर्ण साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।

बचाव पक्ष की दलीलें नहीं टिक सकीं

बचाव पक्ष ने दावा किया कि घटना के समय आरोपी मौके पर मौजूद नहीं था और कुछ अन्य लोग वारदात को अंजाम देकर फरार हुए थे। हालांकि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर इन दलीलों को अस्वीकार कर दिया।

अदालत ने क्या कहा?

फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश मृदुल दुबे ने कहा कि यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि पारिवारिक विश्वास, सामाजिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर आघात है। अदालत ने टिप्पणी की कि एक भाई द्वारा अपनी ही सगी बहन को छह गोलियां मारकर मौत के घाट उतारना अत्यंत क्रूर, अमानवीय और समाज को झकझोर देने वाला कृत्य है।

न्यायालय ने माना कि आरोपी ने संपत्ति विवाद जैसे सीमित कारण के चलते अपने ही परिवार के सदस्यों पर घातक हमला किया। उसने न केवल अपनी बहन की निर्मम हत्या की, बल्कि भाभी की जान लेने का भी प्रयास किया। इसके अतिरिक्त गिरफ्तारी के दौरान पुलिस अधिकारी पर हमला करने का प्रयास उसके आपराधिक आचरण और कानून के प्रति अवमानना को दर्शाता है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अपराध की प्रकृति, उसकी क्रूरता, पीड़िता के साथ आरोपी का निकट संबंध और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए यह मामला “रेरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में आता है। ऐसे अपराधों में कठोरतम दंड दिया जाना न्याय के हित में आवश्यक है।

दोषी को मिली ये सजाएं

अदालत ने ललित चौधरी को हत्या के अपराध में फांसी की सजा सुनाई। इसके अलावा भाभी पर जानलेवा हमले के मामले में आजीवन कारावास, आयुध अधिनियम से जुड़े मामले में आजीवन कारावास तथा पुलिस पर हमले से जुड़े मामले में सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। सभी मामलों में कुल 4 लाख 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

मृत्युदंड के आदेश को कानूनन उच्च न्यायालय की पुष्टि के लिए भेजा जाएगा। उच्च न्यायालय की मंजूरी मिलने के बाद ही फांसी की सजा पर अंतिम निर्णय लागू होगा। फिलहाल यह फैसला आगरा के चर्चित आपराधिक मामलों में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।

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