ज्ञानेश कुमार प्रकरण में CJM कोर्ट का बड़ा आदेश, कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जमानत; पंडित अपूर्व शर्मा समेत पांच अधिवक्ताओं ने की पैरवी

आगरा। जिस गंभीर आरोप के चलते कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा, अदालत में सुनवाई के दौरान उसी आरोप की बुनियाद पर सवाल खड़े हो गए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में CJM अदालत ने धारा 307 को निराधार मानते हुए हटाने का आदेश दिया और सभी अभियुक्तों की जमानत मंजूर कर ली।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा। अदालत के आदेश के बाद जेल में बंद कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

पांच अधिवक्ताओं ने संभाली पैरवी

अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता सुब्रत मेहरा, रूपेश भदौरिया, संतोष दीक्षित, पंडित अपूर्व शर्मा और सुमित रावत ने न्यायालय में पैरवी की। बचाव पक्ष की ओर से रखी गई दलीलों के बाद अदालत ने धारा 307 को निराधार मानते हुए हटाने का आदेश दिया।

“अदालत ने आरोप को निराधार माना”

अधिवक्ता पंडित अपूर्व शर्मा ने कहा, “बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष पूरे तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने धारा 307 के आरोप को निराधार मानते हुए हटाने का आदेश दिया है और सभी अभियुक्तों को जमानत दी है। यह आदेश अभियुक्तों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत है।”

प्रदर्शन के बाद हुई थी गिरफ्तारी

यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित पैतृक आवास पर हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई हुई और कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

अब अदालत के आदेश के बाद मामले में नया मोड़ आया है। धारा 307 हटाए जाने और सभी अभियुक्तों की जमानत मंजूर होने से जेल में बंद कार्यकर्ताओं की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत में जारी रहेगी।

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