आगरा

ट्रैफिक चालान की 'थर्ड आई' ने खोला राज:: आगरा पुलिस ने दिल्ली से दबोचा 24 साल से फरार ₹50 हजार का इनामी

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आगरा।कहते हैं जुर्म की उम्र चाहे जितनी लंबी हो, कानून की एक चालान वाली पर्ची उससे भी लंबी साबित हो सकती है। आगरा की नाई की मंडी थाना पुलिस ने डिजिटल सर्विलांस और सटीक मुखबिरी के दम पर एक ऐसे शातिर अपराधी को दबोचा है, जो पिछले 24 सालों से पुलिस की फाइलों में ‘लापता’ था। ₹50,000 का यह इनामी बदमाश दिल्ली के एक नामी स्कूल में बच्चों को निशानेबाजी सिखा रहा था, लेकिन खुद पुलिस के अचूक निशाने से नहीं बच सका।

नाम बदले, पहचान बदली… पर नहीं बदली फितरत

पकड़े गए आरोपी की पहचान सैमुअल उर्फ सहदेव यादव उर्फ अमित मिश्रा (निवासी शाहगंज, आगरा) के रूप में हुई है। साल 2002 में लोहामंडी थाना क्षेत्र में हुई ₹1 लाख की सनसनीखेज लूट और एक युवती को भगाने के मामले में यह पुलिस की रडार पर था। दो दशकों से ज्यादा वक्त तक गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपनी पूरी पहचान ही बदल डाली थी। दिल्ली के प्रेमनगर (नांगलोई) इलाके में वह ‘अमित मिश्रा’ बनकर रह रहा था और एक नामी प्राइवेट स्कूल में बतौर शूटिंग रेंज टीचर बच्चों को ट्रेनिंग दे रहा था।

एक मामूली चालान और ‘गेम ओवर’

शातिर अपराधी ने सोचा था कि वक्त के साथ उसके गुनाहों की धूल धुंधली पड़ चुकी है, लेकिन दिल्ली की सड़कों पर कटी एक ट्रैफिक चालान की रसीद उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।

  • दिल्ली में आरोपी की कार का ऑनलाइन चालान कटा।
  • आगरा पुलिस की टेक्निकल टीम जब पुराने इनामी अपराधियों के सुराग तलाश रही थी, तो इस गाड़ी के डेटा और लोकेशन ने पुलिस का माथा ठनका दिया।
  • कड़ियां जुड़ती गईं और ‘अमित मिश्रा’ के मुखौटे के पीछे छुपा सैमुअल पुलिस की नजरों में आ गया।

मिशन नांगलोई

नाई की मंडी थाना प्रभारी रोहित कुमार को इस हाई-प्रोफाइल इनामी को दबोचने का जिम्मा सौंपा गया था। चालान से मिले इनपुट और दिल्ली में बिछाए गए मुखबिरों के जाल के बाद, एसओ रोहित कुमार की टीम ने नांगलोई के प्रेमनगर में घेराबंदी की और 24 साल से पुलिस को छका रहे इस शातिर को धर दबोचा।

आगरा पुलिस की बड़ी कामयाबी

लोहामंडी के उस पुराने लूटकांड के बाद से ही पुलिस को इसकी सरगर्मी से तलाश थी। चकमा देने में माहिर इस बदमाश पर ₹50 हजार का इनाम भी घोषित था। आगरा पुलिस इस गिरफ्तारी को अपनी एक बड़ी रणनीतिक कामयाबी मान रही है, जिसने यह साबित कर दिया कि तकनीक के इस दौर में अपराधियों का बचना अब दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।

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