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DNA पड़ताल: छापे के पीछे कहीं वसूलीबाज तथाकथित एसोसिएशन संचालक तो नहीं?

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दवा बाजार में सनसनी: रसूख और फर्जीवाड़े के दम पर अवैध वसूली का खेल; पैसे न देने पर छापा पड़वाने की धमकी सच साबित हुई!

• सूत्रों के अनुसार अवैध वसूली का नया रेट: हॉकरों से ₹13,000 और दुकानदारों से ₹18,000 प्रति छः माह वसूलने का आरोप।
• संगठन चमकाने का हथकंडा: खुद को बड़ा दिखाने के लिए पूर्व स्वर्गीय वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और एक रिटायर्ड अधिकारी के नाम का किया इस्तेमाल।
• धमकी का खौफ: पैसे न देने वाले दुकानदारों को तथाकथित संचालक ने दी थी छापा पड़वाने की धमकी।

आगरा।
दवा बाजार में इन दिनों एक तथाकथित एसोसिएशन और उसके स्वघोषित संचालक की काली करतूतें टॉक ऑफ द टाउन बनी हुई हैं। बाजार में हाल ही में पड़े एक छापे के बाद यह गंभीर सवाल उठने लगा है कि— “क्या इस छापे के पीछे असली हाथ उस तथाकथित वसूलीबाज एसोसिएशन संचालक का है, जिसने कुछ दिन पहले ही दुकानदारों को बर्बाद करने की धमकी दी थी?”

पूरे बाजार में इस समय एक ही चर्चा गर्म है कि अगर तथाकथित संचालक को उसकी मुंह मांगी रकम दे दी गई होती, तो शायद यह छापा पड़ता ही नहीं।

रसूख दिखाने के लिए बड़े नामों का इस्तेमाल

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह तथाकथित संचालक कई वर्षो से बेहद शातिर तरीके से अपना नेक्सस चला रहा है। अपने इस फर्जी संगठन को बड़ा दिखाने, बाजार में धौंस जमाने और व्यापारियों को प्रभावित करने के लिए उसने एक पूर्व स्वर्गीय वरिष्ठ कांग्रेसी नेता को अपने संगठन में “संयोजक” बना डाला, जबकि इस वसूली के खेल को प्रशासनिक रसूख देने के लिए वह एक रिटायर्ड अधिकारी के नाम का भी जमकर इस्तेमाल करता है। इन बड़े नामों की आड़ लेकर वह खुद को रसूखदार साबित करता है और फिर दुकानदारों व हॉकरों पर दबाव बनाता है।

वसूली का ‘नया टैक्स’ लागू, विरोध करने पर अंजाम भुगतने की धमकी

दवाइयों के इस कारोबार में सैंपल और अन्य दवाओं का काम करने वाले हॉकरों और दुकानदारों के लिए इस तथाकथित एसोसिएशन ने अपना “नो छापा टैक्स” फिक्स कर रखा था।

सूत्रों के अनुसार पहले का गणित कुछ ऐसा था:

• हॉकर: ₹8,000 (प्रति छः माह)
• दुकानदार: ₹13,000 (प्रति छः माह)

लेकिन हाल ही में तथाकथित संचालक की भूख और बढ़ी और उसने इस रेट को एकमुश्त बढ़ा दिया। अब नया फरमान जारी हुआ:

• हॉकर से: ₹13,000 (प्रति छः माह)
• दुकानदार से: ₹18,000 (प्रति छः माह)

दुकानदारों ने जब इस बढ़ी हुई रकम का विरोध किया और पैसे देने से साफ मना कर दिया, तो तथाकथित संचालक बौखला गया। उसने खुलेआम धमकी दी थी कि जो पैसे नहीं देगा, उसकी दुकान पर ऐसी छापेमारी करवाएगा कि धंधा चौपट हो जाएगा। आज बाजार में हुआ छापा इसी धमकी का नतीजा माना जा रहा है।

व्यापारियों में भारी आक्रोश और डर का माहौल

फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद से पूरे दवा बाजार के व्यापारियों और हॉकरों में भारी आक्रोश है। दबी जुबान में हर कोई यही कह रहा है कि यह छापा किसी विभाग की निष्पक्ष कार्रवाई नहीं, बल्कि पैसे न मिलने पर तथाकथित संचालक द्वारा प्रायोजित बदला है।

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