आगरा

नकली दवा बेचने वालों की अब खैर नहीं,: बिलिंग से CCTV तक खुलेगा पूरा खेल

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आगरा महानगर केमिस्ट एसोसिएशन के सुझावों का भी असर, विभाग को दिए थे नकली दवाओं का नेटवर्क तोड़ने के सुझाव

आगरा /लखनऊ। दवा की दुकान पर रखी एक संदिग्ध गोली अब सिर्फ दुकान के स्टॉक तक नहीं रुकेगी। उसके पीछे कौन है, माल कहां से आया, किस बिल पर खरीदा गया, किसे बेचा गया और गोदाम में किसने रखा—सबका हिसाब खंगाला जाएगा। नकली और अधोमानक दवाओं के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए उत्तर प्रदेश में जांच का तरीका पूरी तरह सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने 22 अगस्त 2026 को जारी आदेश में दवा लाइसेंस से लेकर निरीक्षण और संदिग्ध दवा मिलने के बाद की कार्रवाई तक के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब जांच सिर्फ दवा के पैकेट या स्टॉक तक सीमित नहीं रहेगी। औषधि निरीक्षक बिलिंग सॉफ्टवेयर, स्टॉक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, ई-वे बिल, परिवहन रसीद और डिजिटल रिकॉर्ड तक खंगाल सकेंगे। जरूरत पड़ने पर दवा की सप्लाई चेन का पीछा करते हुए निर्माता या सप्लायर तक पहुंचने की कार्रवाई होगी।

लाइसेंस किसी के नाम, कारोबार किसी और का मिला तो फंसेगा मामला

विभाग ने थोक दवा लाइसेंस जारी करने के समय भी जांच कड़ी कर दी है। पुराने मामलों में सामने आए संदिग्ध लोगों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के नाम पर नया लाइसेंस जारी करने में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। यह भी जांचा जाएगा कि जिस व्यक्ति के नाम लाइसेंस है, कारोबार वास्तव में वही चला रहा है या नहीं।

यानी कागज पर लाइसेंस किसी और का और दुकान के पीछे कारोबार किसी दूसरे का मिला तो जांच वहीं से आगे बढ़ेगी।

नकली दवा की पहचान पैकेट से ही शुरू होगी

निरीक्षण में दवा के लेबल और पैकिंग की बारीकी से जांच होगी। नाम, फॉर्मूला, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी डेट, निर्माता का पता, फॉयल, पैकिंग, आकार और सुरक्षा चिन्हों की मूल नमूने से तुलना की जाएगी। अंतर मिलने पर नमूना परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।

खास निगरानी डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक, कैंसर और अन्य महंगी दवाओं पर रखने के निर्देश दिए गए हैं। बिना लाइसेंस दवाओं का भंडारण या कारोबार मिलने पर कार्रवाई होगी।

शक हुआ तो बिक्री रोकने से लेकर मुकदमे तक

किसी दवा में गंभीर गड़बड़ी या नकली होने का संदेह मिलने पर तत्काल खरीद-बिक्री की जांच और रोक की कार्रवाई की जाएगी। नकली दवा की पुष्टि होने पर संबंधित स्टॉक सीज करने, लाइसेंस के खिलाफ कार्रवाई और मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। गंभीर मामलों में अन्य संबंधित कानूनों के तहत भी संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी, ईएसआई और डिफेंस सप्लाई की दवाओं, चिकित्सकों के सैंपल तथा एक्सपायर दवाओं की बाजार में बिक्री की पुष्टि होने पर भी प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

आगरा से उठी आवाज भी पहुंची विभाग तक

नकली और संदिग्ध दवाओं के कारोबार पर सख्ती को लेकर आगरा महानगर केमिस्ट एसोसिएशन भी लगातार औषधि विभाग के सामने सुझाव रख रहा था। एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष शर्मा और महामंत्री अश्विनी श्रीवास्तव ने विभाग को दवा की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड मजबूत करने, सप्लाई चेन की तह तक जाने और लाइसेंस जारी करते समय वास्तविक कारोबारी की जांच जैसे कई सुझाव दिए थे। इन सुझावों को भी विभाग ने संज्ञान में लिया है।

आशीष शर्मा, अध्यक्ष, आगरा महानगर केमिस्ट एसोसिएशन ने कहा, “नकली दवा का कारोबार ईमानदारी से काम करने वाले दवा व्यापारियों के साथ मरीजों के लिए भी गंभीर खतरा है। हमने विभाग के सामने सुझाव रखा था कि कार्रवाई केवल उस दुकान तक सीमित न रहे जहां नकली दवा मिली है, बल्कि बिल और सप्लाई चेन के जरिए उसके असली स्रोत तक पहुंचा जाए। नए निर्देशों से ऐसे लोगों पर प्रभावी कार्रवाई में मदद मिलेगी।”

अश्विनी श्रीवास्तव महामंत्री, आगरा महानगर केमिस्ट एसोसिएशन ने कहा, “दवा कारोबार में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। लाइसेंस जिसके नाम है, कारोबार भी उसी की जिम्मेदारी में होना चाहिए। बिलिंग, स्टॉक और सप्लायर का रिकॉर्ड ठीक रहेगा तो नकली दवा बाजार तक पहुंचाने वाले नेटवर्क की पहचान करना आसान होगा। संगठन ने विभाग के सामने इसी तरह की व्यावहारिक व्यवस्था मजबूत करने के सुझाव रखे थे।”

जांच में देरी हुई तो अधिकारी भी सवालों के घेरे में

आदेश में गंभीर मामलों में लाइसेंस निलंबन और निरस्तीकरण की कार्रवाई में अनावश्यक देरी नहीं करने को कहा गया है। लाइसेंस निरस्त होने के बाद फर्म की खरीद-बिक्री पूरी तरह बंद कराने और नियमों के मुताबिक स्टॉक के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। गंभीर उल्लंघन करने वाली फर्मों को भविष्य में लाइसेंस लेने से प्रतिबंधित करने की व्यवस्था भी बताई गई है।

मतलब साफ है—अब नकली दवा मिलने पर सिर्फ दुकान नहीं, बल्कि उसके पीछे खड़ी पूरी सप्लाई चेन जांच के घेरे में आएगी।

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